ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: November 22, 2025 03:27 PM IST
  • Updated: November 22, 2025 03:28 PM IST
उत्तराखंड

“पद की प्रतिष्ठा सीमित, पर कार्यों का सम्मान आजीवन”—सीएम धामी ने अधिकारियों को सेवा के मूल सिद्धांतों की याद दिलाई

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में आज मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की एक अनौपचारिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन सहित सभी वरिष्ठ एवं युवा IAS अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) के संदर्भ में थी।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह किसी औपचारिक संबोधन का अवसर नहीं है, बल्कि प्रशासन के लिए उनकी संवेदनशील और आत्मीय भावनाओं को साझा करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड ने अपनी 25 वर्ष की यात्रा में अनेक चुनौतियों का सामना किया है और इन उपलब्धियों के पीछे राज्य के प्रशासनिक तंत्र की कड़ी मेहनत, निष्ठा और दूरदर्शिता का महत्वपूर्ण योगदान है। मुख्यमंत्री ने कहा:

“आप सभी ने कठिन परिस्थितियों में भी उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता और संवेदनशील प्रशासन का परिचय दिया है। इसके लिए मैं आप सभी को हृदय से साधुवाद देता हूँ।”

“ये समय रुकने का नहीं, आगे बढ़ने का है”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समय अधिक गति, दृढ़ता और संकल्प के साथ काम करने का है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शब्द—“ये दशक उत्तराखंड का दशक है”—का उल्लेख करते हुए कहा कि इस संकल्प को साकार करना प्रशासन का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आने वाले पांच वर्ष उत्तराखंड के लिए निर्णायक होंगे और राज्य को ऐसे मोड़ पर ले जाना है, जहाँ हर नागरिक महसूस करे कि राज्य सकारात्मक परिवर्तन के मार्ग पर है।

उन्होंने स्पष्ट कहा कि प्रशासन को तेजी और पारदर्शिता के साथ काम करना होगा। हर योजना और निर्णय लक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित होना चाहिए। व्यवस्था ऐसी हो कि फाइलों का निस्तारण समयबद्ध हो और योजनाओं का प्रभाव जमीनी स्तर पर तुरंत दिखे।

“ये केवल नौकरी नहीं, समाज सेवा का दायित्व है”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उनकी मूल भावना याद दिलाते हुए कहा कि उन्होंने यह सेवा धन, पद या सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए चुनी है। उन्होंने कहा:

“आपके निर्णय सीधे लाखों लोगों को प्रभावित करते हैं। इसलिए संवेदनशीलता, दूरदृष्टि और तथ्यपरक सोच अत्यंत आवश्यक है।”

उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि कभी-कभी जनता की शिकायतें प्रशासन की छवि को प्रभावित कर सकती हैं। लालफीताशाही, शिकायत न सुने जाने और फाइलों में अनावश्यक देरी जैसी बातें व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। अधिकारियों को जनता के विश्वास को सर्वोपरि रखना चाहिए।

प्रेरणा के उदाहरण

मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक इतिहास में सूर्यप्रताप सिंह, टी. एन. शेषन, नृपेंद्र मिश्र जैसे अधिकारियों के उदाहरण प्रस्तुत किए, जिन्होंने अपनी ईमानदारी, संकल्प और जनसेवा के माध्यम से समाज में स्थायी छाप छोड़ी। उन्होंने कहा:

“पद की प्रतिष्ठा आपके कार्यकाल तक है, लेकिन आपके कार्यों का सम्मान आजीवन रहता है।”

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने पद को केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज सेवा का पवित्र अवसर समझें।

“उदासीनता की कोई जगह नहीं”

उन्होंने कहा कि आज के ‘नए भारत’ में उदासीन कार्यशैली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी कार्य तेजी और सूझबूझ के साथ पूरे किए जाएं। योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पारदर्शिता और समयबद्धता से पहुंचे। अधिकारियों को अपने क्षेत्रों में मासिक समीक्षा, निरंतर मॉनिटरिंग और साइट निरीक्षण सुनिश्चित करना चाहिए।

विकल्प रहित संकल्प के साथ कार्य

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के मंत्र के साथ उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए कार्यरत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि IAS अधिकारी अपनी निष्ठा, मेहनत और संकल्प के साथ इस लक्ष्य को प्राप्त करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहेंगे।

कार्यक्रम में मुख्य सचिव ने वर्तमान में चल रहे प्रशासनिक अधिकारी सम्मेलन (AOC) के अनुभव साझा किए।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×