उत्तराखंड के रुद्रपुर स्थित तराई केंद्रीय वन प्रभाग की टांडा रेंज से जंगलों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां पत्थरचट्टा बीट संख्या 13, 14, 4 और 2 में वन माफियाओं ने सागौन और शीशम जैसे कीमती और हरे-भरे दर्जनों पेड़ों पर आरा चला दिया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इतनी बड़ी अवैध कटाई होने के बावजूद वन विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी। स्थानीय सूत्रों के अनुसार यह पूरा खेल पिछले लगभग तीन महीनों के भीतर हुआ। भारी-भरकम और कीमती सागौन के पेड़ों को काटकर जंगल से बाहर भी निकाल लिया गया, लेकिन जिम्मेदार वन अमला मानो आंखें मूंदे बैठा रहा।
ये पेड़ केवल लकड़ी नहीं थे, बल्कि जंगल की सांस थे। इन्हीं पेड़ों की छांव में पक्षियों का बसेरा था, वन्यजीवों का घर था और पर्यावरण का संतुलन कायम रहता था। जब ऐसे हरे-भरे पेड़ गिरते हैं तो सिर्फ जंगल नहीं, बल्कि प्रकृति भी घायल होती है।
वन विभाग अक्सर जंगलों में तस्करों के खिलाफ सख्त अभियान चलाने और लगातार गश्त के दावे करता है, लेकिन पत्थरचट्टा बीट में दर्जनों पेड़ों की कटाई ने इन दावों की पोल खोल दी है। इतना बड़ा अवैध कटान बिना किसी की मिलीभगत या गंभीर लापरवाही के संभव नहीं माना जा रहा, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी तरह जंगलों में हरे-भरे पेड़ों पर आरा चलता रहा तो आने वाले समय में इस क्षेत्र के जंगलों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी अवैध कटाई के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है? क्या इस मामले में दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और वन माफियाओं के साथ-साथ लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
इस संबंध में टांडा रेंज के वन क्षेत्राधिकारी Roop Narayan Gautam का कहना है कि यह मामला लगभग तीन महीने पुराना है। विभाग द्वारा इस मामले में जुर्माना लगाया जा चुका है और इसमें शामिल आरोपियों की तलाश जारी है। उनका कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।






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