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  • Written By: Admin
  • Published: December 04, 2025 11:03 AM IST
राजनीति

“चौंकाने वाला खुलासा: कालसी की जमीन का मालिक बना ‘पाकिस्तानी’? प्रशासन पर मिलीभगत के गंभीर आरोप!”

देहरादून/कालसी। उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा ने कालसी तहसील और आसपास के जनजातीय क्षेत्रों में बदलती डेमोग्राफी को लेकर सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष बॉबी पंवार ने प्रेस वार्ता में आरोप लगाया कि जनजातीय क्षेत्र की संवैधानिक संरचना को कमजोर करने वाली गतिविधियों पर शासन-प्रशासन की चुप्पी चिंताजनक है।

पाकिस्तानी वीडियो के हवाले से विवादित जमीन पर बड़ा दावा

पंवार ने आरोप लगाया कि कालसी की एक विवादित भूमि को लेकर पाकिस्तान से दो वीडियो जारी हुए हैं, जिसमें एक व्यक्ति इस जमीन को अपनी पैतृक संपत्ति बता रहा है। उन्होंने कहा कि इसी भूमि को जम्मू-कश्मीर के एक व्यक्ति ने खरीद लिया है, जबकि जनजातीय क्षेत्र में बाहरी व्यक्ति—चाहे वह देहरादून जिले के अन्य हिस्सों का ही क्यों न हो—जमीन नहीं खरीद सकता।

पूर्व पुलिसकर्मी पर नियमों के उल्लंघन का आरोप

पंवार ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस विभाग में कार्यरत रह चुका गुलाम हैदर राजनीतिक संरक्षण और सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर जनजातीय क्षेत्र में जमीन खरीद रहा है, जो सुरक्षा मानकों और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।

2024 वाला मामला फिर चर्चा में, कार्रवाई दबाने के आरोप भी दोहराए गए

मोर्चा अध्यक्ष ने बताया कि फरवरी 2024 में भी इसी तरह का मामला उठाया गया था। तब कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन बाद में अधिकारियों द्वारा “लीपापोती” कर प्रकरण को दबा दिया गया।
उन्होंने कहा कि विकासनगर और कालसी में फर्जी प्रमाणपत्रों के बड़े पैमाने पर बनने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जो डेमोग्राफी में बदलाव की आशंका को और बढ़ाती हैं।

सरकार पर आरोप—“डेमोग्राफी पर प्रचार, लेकिन जमीनी स्तर पर मौन”

पंवार ने कहा कि भाजपा सरकार डेमोग्राफी पर जोरदार प्रचार कर रही है, जबकि संवेदनशील मामलों में न सरकार सक्रिय है, न प्रशासन।
उन्होंने माँग की—

  • दोषी अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए

  • मामले की उच्चस्तरीय जांच हो

साथ ही चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो मोर्चा सड़क पर उतरकर बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा।

मोर्चा महासचिव का बयान—“राज्य की बागडोर गलत हाथों में”

महासचिव राजेंद्र प्रसाद भट्ट ने कहा कि राज्य की बागडोर गलत हाथों में चली गई है और आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है। मोर्चा का दावा है कि वह इन मुद्दों को हर स्तर पर उजागर करेगा।

यह विवाद आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति को गरमा सकता है, क्योंकि मामला सुरक्षा, जनजातीय अधिकार और डेमोग्राफी परिवर्तन से जुड़ा हुआ है।

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