Sania Rana ने अपने साहस और मेहनत से साबित किया है कि टैक्सी चालक पेशे में महिलाएं पीछे नहीं हैं। चौबट्टाखाल क्षेत्र के गिंवली गांव की सानिया न सिर्फ अपनी पहचान बना रही हैं, बल्कि पिता की मृत्यु के बाद परिवार की आजीविका में अपने भाई के साथ सहयोग भी कर रही हैं।
सानिया के पिता Kamlesh Singh Rana चाहते थे कि उनकी बेटी भी बेटे की तरह कार चलाना सीखे। 18 वर्ष की उम्र में सानिया ने अपने पिता से ड्राइविंग का प्रशिक्षण लिया और व्यावसायिक लाइसेंस प्राप्त किया।
जनवरी 2026 में पिता की गंभीर बीमारी और 2 फरवरी को उनकी मृत्यु के बावजूद सानिया ने हिम्मत नहीं हारी। पिता की तेरहवीं के बाद उन्होंने पिता की कार का स्टेयरिंग थाम लिया। आज उनकी टैक्सी सतपुली, नौगांवखाल और चौबट्टाखाल सहित आसपास के क्षेत्रों में प्रतिदिन चलती है। सवारी लेकर वह कोटद्वार और देहरादून भी जाती हैं।
सानिया चौबट्टाखाल स्थित Government College Chaubattakhal से स्नातक कर रही हैं। उन्होंने बताया कि पिता ने उन्हें सिखाया कि रोजगार वहीं मौजूद है, इसलिए इधर-उधर क्यों भटकना। पिता की सीख और मार्गदर्शन से उन्होंने टैक्सी व्यवसाय में कदम रखा।
वर्तमान में वह बैंक से लिए गए ऋण की किस्त भी जमा कर रही हैं। घर पर उनकी मां, बड़ी बहन, बड़ा भाई और भाभी हैं, और परिवार की आर्थिकी में वह भाई के साथ पूरा सहयोग कर रही हैं।
सानिया राणा की कहानी महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देती है, जो साबित करती है कि साहस और मेहनत से कोई भी सामाजिक बाधा पार की जा सकती है।






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