देहरादून। रोज़ी-रोजगार के लिए पहाड़ से पलायन करने वाले अब घर वापसी करने लगे हैं। विदेश से भी लोग उत्तराखंड लौट रहे हैं और दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। राज्य निर्माण के बाद से ही पहाड़ों से पलायन उत्तराखंड की एक बड़ी विभीषिका रही है। पहाड़ में बुनियादी सुविधाओं का अभाव एवं रोज़ी-रोज़गार के साधनों की अनुपलब्धता इसकी एक प्रमुख वजह रही है। राज्य में पलायन से जुड़ी एक बड़ी विडंबना यह रही कि अब से पहले पहाड़ से पलायन को लेकर सरकारी स्तर पर केवल चिंता ही जाहिर की जाती थी। धरातल पर पलायन रोकने तथा प्रवासियों को उत्तराखंड में वापस स्थापित करने की दिशा में कारगर सरकारी उपाय कम ही देखने को मिलते थे।
लेकिन जैसे ही पुष्कर सिंह धामी की वर्तमान उत्तराखंड सरकार ने पहाड़ों पर बुनियादी सुविधाओं का ढांचा मजबूत किया, वैसे ही इसके सुखद परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं। रोज़ी-रोज़गार के लिए उत्तराखंड छोड़ने वाले लोग अब घर वापसी कर अपने आपको उत्तराखंड में स्थापित कर रहे हैं, साथ ही अन्य लोगों के लिए भी रोजगार का सृजन कर रहे हैं।
अभी हाल में ही उत्तराखंड पलायन आयोग ने प्रदेश में वापस लौटे प्रवासियों को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। इसके आंकड़े काफी राहत देने वाले हैं। पलायन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में अगस्त 2025 तक तकरीबन 6282 लोगों ने रिवर्स पलायन किया है। ये लोग रोज़ी-रोज़गार के चलते लंबे समय से अपने गांव से दूर रह रहे थे। इन्होंने पिछले कुछ सालों में पलायन किया था, लेकिन हाल के वर्षों में प्रदेश में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार एवं विकास और सरकारी प्रोत्साहन के बाद धीरे-धीरे इनका रिवर्स पलायन आरंभ हो गया है।
खास बात यह है कि रिवर्स पलायन करने वाले लोगों ने उत्तराखंड लौटकर एग्रीकल्चर, पशुपालन, लघु उद्योग, हस्तशिल्प, पर्यटन और होमस्टे जैसे व्यवसायों में हाथ आजमाया है। पलायन आयोग के आंकड़ों के अनुसार रिवर्स पलायन करने वाले जिलों में सबसे ज्यादा 1213 लोग पौड़ी में लौटे हैं। इसके बाद अल्मोड़ा में 976, टिहरी में 827, और चमोली में 760 लोगों ने रिवर्स पलायन किया है। पूरे उत्तराखंड में कुल 6282 लोगों ने रिवर्स पलायन किया है।
पलायन आयोग की हालिया रिपोर्ट का सबसे उत्साहजनक पहलू यह है कि उत्तराखंड में अब तक 169 लोग विदेश से भी रिवर्स पलायन कर चुके हैं। इनमें से सबसे ज्यादा 66 लोग टिहरी जिले में विदेश से वापस लौटे हैं। इसके अलावा देश के अन्य राज्यों, राज्य के अन्य जिलों तथा निकटवर्ती शहरों से भी लोग अपने-अपने गांवों में रिवर्स पलायन कर रहे हैं।
पलायन आयोग के अध्यक्ष एस.एस. नेगी के अनुसार आयोग ने पिछले तीन महीनों में पूरे प्रदेश में सर्वे कर उन गांवों को चिन्हित किया, जहां लोगों ने रिवर्स पलायन किया है। सर्वे में पाया गया कि प्रदेश भर में अभी तक 6000 से ज्यादा लोगों ने रिवर्स पलायन किया है। ये लोग अलग-अलग सेक्टरों में नए तौर-तरीकों के साथ काम कर रहे हैं। ये बागवानी, मत्स्य पालन, पर्यटन सहित अन्य रोजगार गतिविधियों से अपनी आजीविका की नई शुरुआत कर रहे हैं। यही नहीं, इन लोगों ने अन्य को भी रोजगार देने का काम किया है।






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