पिथौरागढ : खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिथौरागढ़ जिले में कार्रवाई करते हुए पतंजलि ब्रांडेड घी के एक सैंपल को मानकों पर खरा न उतरने पर सब-स्टैंडर्ड घोषित किया। इस मामले में निर्माता कंपनी, वितरक और खुदरा विक्रेता पर कुल ₹1,40,000 का जुर्माना लगाया गया। यह कार्रवाई अक्टूबर 2020 में सैंपलिंग के आधार पर हुई, जिसका फैसला हाल ही में कोर्ट ने सुनाया।
अक्टूबर 2020 में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पिथौरागढ़ बाजार की एक दुकान से पतंजलि घी का सैंपल लिया और रुद्रपुर स्थित प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा। लैब रिपोर्ट में सैंपल को सब-स्टैंडर्ड पाया गया, जिसके आधार पर कंपनी, वितरक और दुकानदार को नोटिस जारी किया गया।
पतंजलि कंपनी ने रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज की, जिसके बाद सैंपल को केंद्रीय रेफरल फूड लैब (RFL) भेजा गया। दूसरी जांच में भी घी को निम्न गुणवत्ता वाला पाया गया, जिसके बाद मामला कोर्ट पहुंचा। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद तीनों जिम्मेदार पक्षों पर आर्थिक दंड लगाया गया।
निर्माता कंपनी पतंजलि — ₹1,00,000
वितरक — ₹25,000
खुदरा विक्रेता — ₹15,000
कुल राशि — ₹1,40,000 (विभाग में जमा की जाएगी)
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि मानकों का कौन-सा पैरामीटर फेल हुआ, लेकिन घी गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा।
पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड पहले भी कई बार उत्पाद गुणवत्ता और भ्रामक विज्ञापनों को लेकर विवादों में रही है:
भ्रामक विज्ञापन मामला (2022–2024) – सुप्रीम कोर्ट ने ‘झूठे और भ्रामक’ दावे करने पर कड़ी टिप्पणी की; कई दवाओं के लाइसेंस निलंबित किए गए।
गुणवत्ता जांच में सवाल (2020–2022) – टिहरी गढ़वाल में भी पतंजलि घी का सैंपल फेल पाया गया था।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप (2024–2025) – कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय ने संदिग्ध लेन-देन पर नोटिस जारी किया।
मार्केटिंग और प्रतिस्पर्धी विवाद – डाबर और अन्य कंपनियों के साथ तुलना आधारित विज्ञापनों को लेकर कई बार भारी जुर्माने।
विभाग ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि संदिग्ध उत्पादों की शिकायत तुरंत दर्ज कराएं और ख़रीदारी से पहले लेबल व प्रमाणन अवश्य जांचें






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