उत्तराखंड में नर्सिंग अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। वर्षवार भर्ती प्रणाली की बहाली की मांग को लेकर चल रहा नर्सिंग अधिकारियों का धरना शनिवार को 100वें दिन में प्रवेश कर गया। इतने लंबे समय से आंदोलन कर रहे हजारों प्रशिक्षित युवाओं का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे उनका भविष्य अधर में लटक गया है।
दरअसल, प्रदेश में वर्षवार भर्ती प्रणाली को फिर से लागू करने की मांग लंबे समय से उठ रही है। नर्सिंग अभ्यर्थियों का आरोप है कि इस व्यवस्था के खत्म होने के बाद कई बैच वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। नतीजतन हजारों योग्य और प्रशिक्षित युवाओं को रोजगार के अवसर नहीं मिल पा रहे हैं।
धरना स्थल पर मौजूद अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार को सभी लंबित बैचों को वर्षवार भर्ती प्रणाली के तहत समायोजित करना चाहिए, ताकि वर्षों से इंतजार कर रहे युवाओं को न्याय मिल सके।
नर्सिंग अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान उनकी मांग विधानसभा में उठेगी और सरकार कोई सकारात्मक संकेत देगी। लेकिन जब बजट सत्र में उनकी मांग पर कोई चर्चा नहीं हुई, तो इससे अभ्यर्थियों में गहरा रोष फैल गया।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर और उग्र किया जाएगा। उनका कहना है कि यह केवल रोजगार का सवाल नहीं बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।
अब देखना होगा कि 100 दिन पूरे कर चुके इस आंदोलन पर सरकार कब तक कोई निर्णायक कदम उठाती है, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है।






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