सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस की अदालत में 10 दिसंबर को फैसला होने की संभावना
पहले स्टे आदेश और पुनर्वास योजना की आवश्यकता
रेलवे और राज्य प्रशासन की तैयारी, सुरक्षा अलर्ट जारी
हल्द्वानी: बनभूलपुरा रेलवे अतिक्रमण मामले की सुनवाई 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली है। चीफ जस्टिस की अदालत में इस दिन संभवतः फैसला भी सुनाया जा सकता है। पिछली सुनवाई 2 दिसंबर को लंबी चलने के कारण टाल दी गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट में दलील दी कि वे दशकों से (कुछ परिवार तो आज़ादी से पहले) उस जमीन पर रह रहे हैं और उनके रिकॉर्ड नगरपालिका और हाउस टैक्स में दर्ज हैं। उनका तर्क है कि अचानक खाली करने का आदेश बिना पुनर्वास योजना के नहीं होना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई थी और जुलाई 2024 में आदेश दिया कि पुनर्वास योजना बनाई जाए। कोर्ट ने प्रभावित लोगों को आवास या वैकल्पिक जमीन देने पर जोर दिया।
रेलवे ने कोर्ट में कहा कि उनके पास पुनर्वास या मुआवजे की कोई नीति नहीं है। रेलवे का तर्क है कि यह जमीन वैध रूप से रेलवे की है। राज्य और केंद्र सरकार को पुनर्वास योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
इतिहास और प्रगति:
2007 से लेकर 2022 तक हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुईं।
2013 और 2016 में हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने और पुनर्वास की दिशा में निर्देश दिए।
2022 में रेलवे और प्रशासन के द्वारा कार्रवाई नहीं होने पर मामला सुप्रीम कोर्ट में गया।
वर्तमान स्थिति:
10 दिसंबर की सुनवाई को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया है और उच्च स्तरीय बैठकें की हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पुनर्वास योजना और प्रभावित लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।






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