नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के बीच एक सकारात्मक घटनाक्रम में, लोकसभा ने उन आठ सांसदों की वापसी का मार्ग प्रशस्त कर दिया है जिन्हें 3 फरवरी को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित किया गया था।
सदन की कार्यवाही के दौरान कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश ने कुछ सदस्यों द्वारा की गई "अनजाने में हुई चूक" के लिए खेद व्यक्त किया। इसके तुरंत बाद, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने निलंबन वापसी का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा, जिसे ध्वनि मत से स्वीकार कर लिया गया।
निलंबन वापसी के दौरान सदन में मर्यादा को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गईं:
के. सुरेश (कांग्रेस): उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष सदन चलाने में पूर्ण सहयोग के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही यह मांग भी रखी कि विपक्ष को बोलने का समान अवसर मिलना चाहिए।
किरेन रिजिजू (केंद्रीय मंत्री): उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने के लिए एक 'लक्ष्मण रेखा' होनी चाहिए, जिसे किसी भी सदस्य को पार नहीं करना चाहिए।
धर्मेंद्र यादव (सपा): उन्होंने सत्ता पक्ष को याद दिलाया कि सदन की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी केवल विपक्ष की नहीं, बल्कि ट्रेजरी बेंचों की भी है।






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