Khatima/Dehradun। उत्तराखंड के खटीमा में गैस संकट की जमीनी हकीकत दिखाना एक पत्रकार को भारी पड़ गया। वरिष्ठ पत्रकार Deepak Fulera के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है, जिससे मीडिया जगत में आक्रोश व्याप्त है।
जानकारी के अनुसार, चकरपुर क्षेत्र में गैस सिलेंडर के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी थीं। आम नागरिक सुबह से ही गैस के लिए परेशान थे। इस समस्या को दीपक फुलेरा ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमुखता से उठाया।
हालांकि, इस रिपोर्टिंग के बाद Kamaldeep Singh Rana, भाजपा मंडल महामंत्री, ने आपत्ति जताई। आरोप है कि उनकी तहरीर पर पुलिस ने बिना प्रारंभिक जांच के ही भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(1)(B) के तहत मामला दर्ज कर लिया। शिकायत में कहा गया कि इस खबर से “सरकार की छवि धूमिल” हुई है।
इस कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या जनता की समस्याओं को उजागर करना अब अपराध माना जाएगा? यदि पत्रकार ही जमीनी सच्चाई सामने नहीं लाएंगे, तो लोकतंत्र में आम जनता की आवाज कैसे सुनी जाएगी?
इस घटना पर Nationalist Union of Journalists (NUJ) उत्तराखंड ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। संगठन ने इसे “मीडिया की आवाज दबाने का कुत्सित प्रयास” बताते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाइयां प्रेस की स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा हैं।
पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि सच्चाई दिखाने पर पत्रकारों के खिलाफ इस तरह मुकदमे दर्ज होते रहे, तो भविष्य में कोई भी पत्रकार निष्पक्ष रूप से रिपोर्टिंग करने का साहस नहीं कर पाएगा।
खटीमा की यह घटना उत्तराखंड में प्रेस की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।






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