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  • Written By: Admin
  • Published: November 18, 2025 03:21 PM IST
  • Updated: November 18, 2025 03:22 PM IST
उत्तराखंड

केदारनाथ धाम में बढ़ती भीड़ बनी चुनौती, पिछले साल से 325 टन ज्यादा कूड़ा इकट्ठा

केदारनाथ धाम में रिकॉर्ड 17.68 लाख तीर्थयात्री, पिछले वर्ष से 325 टन अधिक कचरा इकट्ठा

इस साल केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों की संख्या ने नया रिकॉर्ड बनाया। पूरे यात्रा सीजन में 17.68 लाख श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए। श्रद्धालुओं की इतनी बड़ी संख्या पहुंचने से धाम और यात्रा मार्ग पर हजारों टन कूड़ा जमा हो गया।

कपाट बंद होने तक 2324 टन कचरा
23 अक्टूबर को कपाट बंद होने तक छह महीने की अवधि में धाम, पैदल मार्ग, पड़ावों और बाजारों से कुल 2324 टन कचरा एकत्र किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 325 टन अधिक है। यात्रा समाप्त होने के बाद भी लगभग 10 दिन तक विशेष सफाई अभियान चलाया गया। अब धाम और पूरा मार्ग पूरी तरह साफ कर दिया गया है।

प्लास्टिक सबसे बड़ी चुनौती
यात्री अक्सर प्लास्टिक की बोतलें, डिस्पोज़ल, रेनकोट और अन्य सामान रास्ते में ही छोड़ देते हैं, जिससे कचरे की मात्रा बढ़ जाती है। धाम की सफाई की जिम्मेदारी सुलभ इंटरनेशनल के पास है। हर साल इसके 450 से अधिक कर्मचारी सोनप्रयाग, गौरीकुंड, सीतापुर, फाटा और रामपुर तक सफाई कार्य में जुटे रहते हैं।

कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण
कूड़े को अलग-अलग श्रेणियों में इकट्ठा किया जाता है—

  • घोड़े-खच्चरों की लीद

  • प्लास्टिक

  • जैविक कचरा

प्लास्टिक और पशुओं की लीद का निस्तारण सोनप्रयाग क्षेत्र में किया जाता है, जबकि जैविक कचरा गौरीकुंड से वाहनों द्वारा 70 किमी दूर रैंतोली (रुद्रप्रयाग) स्थित निस्तारण केंद्र ले जाया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं।

पर्यावरण पर बढ़ता दबाव
कचरे की लगातार बढ़ती मात्रा यह संकेत देती है कि बढ़ती भीड़ से हिमालयी पर्यावरण पर भारी दबाव पड़ रहा है और सफाई व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

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