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  • Written By: Admin
  • Published: March 14, 2026 02:22 PM IST
  • Updated: March 14, 2026 02:25 PM IST
उत्तराखंड

भवाली में मानव तस्करी पर दो दिवसीय ज्यूडिशियल कोलोक्वियम शुरू, न्यायपालिका-पुलिस समन्वय पर जोर

मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध से निपटने और इससे जुड़े मामलों में न्यायिक कार्रवाई को मजबूत बनाने के उद्देश्य से उत्तराखंड ज्यूडिशियल एंड लीगल एकेडमी (उजाला), भवाली में शनिवार को दो दिवसीय ज्यूडिशियल कोलोक्वियम ऑन ह्यूमन ट्रैफिकिंग का शुभारंभ हुआ। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में न्यायपालिका, पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलन के साथ उत्तराखंड उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मानव तस्करी समाज के लिए एक गंभीर चुनौती है और इससे निपटने के लिए सभी संस्थाओं के बीच मजबूत समन्वय बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इस कोलोक्वियम का उद्देश्य मानव तस्करी से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बढ़ाना और प्रभावी कानूनी कार्रवाई को सुनिश्चित करना है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि दो दिवसीय कार्यशाला में विशेषज्ञों द्वारा मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों के पुनर्वास, जांच प्रक्रिया और न्यायिक कार्यवाही से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। साथ ही प्रतिभागियों को कानून, जांच प्रणाली और पीड़ित सहायता से संबंधित व्यावहारिक जानकारी भी दी जाएगी।

इस कार्यक्रम में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी, उजाला के प्रभारी न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी, न्यायमूर्ति आलोक मेहरा, न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय तथा न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में अकादमी के निदेशक प्रदीप पंत, उत्तराखंड उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल योगेश कुमार गुप्ता, जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल, राज्य के विभिन्न जिलों के जिला जज, उजाला की अपर निदेशक शादाब बानो, अपर निदेशक तरुण, संयुक्त निदेशक मो. यूसुफ तथा सहायक निदेशक कार्तिकेय जोशी सहित पुलिस विभाग, अभियोजन अधिकारियों और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

दो दिवसीय इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से आए न्यायिक अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस विभाग के अधिकारी, अभियोजन अधिकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित 150 से अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। विशेषज्ञों के साथ संवाद और चर्चा के माध्यम से मानव तस्करी से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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