रामनगर। वन ग्रामों को राजस्व ग्राम का दर्जा और ग्रामीणों को मालिकाना हक दिलाने की मांग अब आर-पार की लड़ाई में बदल गई है। गुरुवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत तथा ज्येष्ठ उप प्रमुख संजय नेगी के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने रामनगर की सड़कों पर उतरकर अपना रोष प्रकट किया।
महाविद्यालय से तहसील तक गूंजे नारे आंदोलन की शुरुआत पीएनजी पीजी कॉलेज के बाहर से हुई, जहाँ भारी संख्या में जन प्रतिनिधि और ग्रामीण एकत्र हुए। यहाँ से शुरू हुआ जुलूस रानीखेत रोड और मोहल्ला खताड़ी होते हुए तहसील परिसर पहुंचा। प्रदर्शनकारियों के नारों से पूरा शहर गूंज उठा। तहसील में सांकेतिक धरने के बाद एसडीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भेजा गया।
"भाजपा की नजर में खटक रहा है गरीब" — हरीश रावत धरने को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सरकार की नीतियों पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने कहा:
अतिक्रमण की कार्रवाई: "भाजपा सरकार अतिक्रमण के नाम पर पूछड़ी जैसे गांवों में बुलडोजर चलाकर लोगों को बेघर कर रही है।"
पूंजीपतियों का लाभ: "गरीबों की जमीन छीनकर उसे मुनाफाखोरी के लिए पूंजीपतियों को लीज पर दिया जा रहा है।"
डेमोग्राफी का भ्रम: "सरकार डेमोग्राफी चेंज होने का डर दिखाकर जनता में भ्रम फैला रही है और केवल गरीबों के आशियाने उजाड़ रही है।"
कानून का पालन: "सरकार को वन अधिकार कानून (FRA) का अनुसरण करते हुए ग्रामीणों को उनका वाजिब हक देना चाहिए।"
कांग्रेस के दिग्गजों की मौजूदगी प्रदर्शन में ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, नगर पालिका अध्यक्ष हाजी मोहम्मद अकरम, पूर्व दर्जा मंत्री पुष्कर दुर्गापाल और डॉ. निशांत पपने सहित कई दिग्गज शामिल हुए। मालिकाना संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस. लाल और ग्राम प्रधान संगठन के अध्यक्ष नवीन सती ने भी वन ग्रामों की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने का संकल्प दोहराया।
जुलूस में युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुमित लोहनी, ताइफ खान, और ललित कड़ाकोटी सहित सैकड़ों की तादाद में लोग मौजूद रहे, जिससे रामनगर तहसील परिसर छावनी में तब्दील नजर आया।






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