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  • Written By: Admin
  • Published: November 25, 2025 10:59 AM IST
उत्तराखंड

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला की गर्दन से 1 किलोग्राम का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाला

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के नाक- कान- गला रोग विभाग के डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। डॉक्टरों ने एक महिला मरीज की टोटल थायरॉयडेक्टॉमी का सफल ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान मरीज की गर्दन से 1 किलोग्राम वजन का थायरॉयड ट्यूमर हटाया गया। यह ट्यूमर आकार में अत्यंत बड़ा था। खास बात यह है कि गर्दन जैसी छोटी जगह में सामान्य थायरॉयड का वजन केवल 25 ग्राम होता है।

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने ईएनटी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिप्ती ममगाईं और उनकी टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

रोगी श्रीमती शबनम (निवासी रामनगर, नैनीताल) पिछले छह वर्षों से गंभीर रूप से बढ़े हुए थायरॉयड सूजन, हाइपरथायरॉयडिज्म और बाएँ रिकरेंट वोकल कॉर्ड पाल्सी से पीड़ित थीं। अत्यधिक बढ़ चुके ट्यूमर ने भोजन और श्वास मार्ग पर दबाव डालकर स्थिति को गंभीर बना दिया था। सूजन के कारण बाएँ रिकरेंट लैरिंजल नर्व पर दबाव पड़ने से वोकल कॉर्ड लकवा भी हुआ था।

इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व ईएनटी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. त्रिप्ती ममगाईं ने किया। उनकी टीम में डॉ. शरद हर्नौत, डॉ. ऋषभ डोगरा, डॉ. फातिमा अंजुम, डॉ. सौरभ नौटियाल और एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. पुनीत शामिल थे। चार घंटे चली इस चुनौतीपूर्ण टोटल थायरॉयडेक्टॉमी में सर्जरी और एनेस्थीसिया दोनों स्तरों पर जोखिम अत्यंत उच्च था, क्योंकि मरीज हाइपरथायरॉयडिज्म से भी ग्रस्त थीं।

डॉ. त्रिप्ती ममगाईं ने बताया कि उन्होंने संशोधित चीरा तकनीक का उपयोग किया, जिससे महत्त्वपूर्ण संरचनाओं, विशेषकर रिकरेंट लैरिंजल नर्व और पैराथायरॉयड ग्रंथियों को सुरक्षित रखते हुए विशाल ग्रंथि को हटाना संभव हुआ। इस प्रक्रिया में छाती खोलने की आवश्यकता नहीं पड़ी, जो इस उपलब्धि को और भी उल्लेखनीय बनाता है। उन्होंने कहा कि यदि ट्यूमर समय रहते नहीं हटाया जाता, तो यह जीवन-घातक जटिलताओं को जन्म दे सकता था।

सर्जरी के बाद मरीज ने कहा कि कई अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों ने इस जटिल स्थिति को देखते हुए सर्जरी से मना कर दिया था, परंतु श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल की ईएनटी टीम ने चुनौती स्वीकार की और उत्कृष्ट परिणाम दिया। रोगी अब स्वस्थ हैं और अपने आप को “दूसरा जीवन मिलने” जैसा अनुभव कर रही हैं।

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