हरिद्वार। शनिवार सुबह वन प्रभाग हरिद्वार के देवपुरा बीट में एक दांत वाले करीब 55 वर्षीय जंगली हाथी की मौत से वन विभाग में हड़कंप मच गया। निर्माणाधीन रिंग रोड के पास जंगल में हाथी का शव मिला। हाथी पिछले करीब दो सप्ताह से जगजीतपुर क्षेत्र के आसपास आबादी और कृषि भूमि में लगातार आवाजाही कर रहा था। कई बार वह फेंसिंग तोड़कर आबादी में भी पहुंच गया था। मानव हाथी संघर्ष की आशंका को देखते हुए वन विभाग की हाथी मॉनिटरिंग टास्क फोर्स उसकी गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही थी। बीमार होने के बाद हाथी को बचाने के लिए वन विभाग, डब्ल्यूआईआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन्यजीव पशु चिकित्सकों की संयुक्त टीम ने उपचार किया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
वन विभाग के अनुसार, देवपुरा बीट और आसपास के क्षेत्रों में हाथियों की नियमित निगरानी के दौरान इस हाथी की गतिविधियां हरिद्वार शहर और मानव बस्तियों के बेहद करीब पाई गई थी। हाथी नियमित रूप से आबादी वाले क्षेत्रों और कृषि भूमि में घूम कर रहा था। कई बार उसके हरिद्वार शहर की ओर आने की वायरल वीडियो भी सामने आई थी। संभावित मानव हाथी संघर्ष को देखते हुए हाथी को विशेष रूप से चिह्नित कर उसकी निगरानी शुरू की गई थी। इसी दौरान छह नवंबर को भारतीय वन्यजीव संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ विशेषज्ञों, अनुभवी वन्यजीव पशु चिकित्सकों और वन विभाग की संयुक्त टीम ने हाथी को विशेषज्ञों की निगरानी में डार्ट किया। इसके बाद हाथी की लगातार वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया। उपचार के दौरान उसकी स्थिति अचानक बिगड़ गई। उसे तत्काल ऑक्सीजन, सीपीआर, रिवर्सल औषधि और अन्य आपातकालीन पशु चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराया गया। टीम ने हाथी को बचाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और पशु चिकित्साधिकारियों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद स्वतंत्र पशु चिकित्सक विशेषज्ञ दल ने हाथी का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में हाथी की उम्र करीब 55 वर्ष बताई जा रही है।बाहरी तौर पर हाथी की स्थिति सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन आंतरिक परीक्षण में हृदय संबंधी गंभीर बीमारी पाए गए। डॉक्टरों के अनुसार, हाथी के हृदय में मायोकार्डियल फाइब्रोसिस और कार्डियोमायोपैथी जैसे परिवर्तन मिले, जो उसकी मौत का कारण बने. वन विभाग के अनुसार, हृदय संबंधी इस तरह के विकार का दूर से केवल बाहरी निरीक्षण के आधार पर पता लगाना संभव नहीं था।






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