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  • Written By: Admin
  • Published: November 14, 2025 03:04 PM IST
उत्तराखंड

“मुख्यमंत्री धामी ने लॉन्च किया ‘सांस अभियान 2025–26’, हर बच्चे की बेहतर सेहत के लिए लिया गया सामूहिक संकल्प”

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि बाल स्वास्थ्य को लेकर सरकार बेहद गंभीर है और ‘सांस अभियान’ को एक जन-आंदोलन की तरह संचालित किया जा रहा है।

विश्व निमोनिया दिवस पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, उत्तराखंड के तहत संचालित ‘सांस अभियान (Social Awareness and Action to Neutralize Pneumonia Successfully) 2025–26’ का राज्य स्तरीय शुभारंभ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) डोईवाला, देहरादून में किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को निमोनिया से बचाना और बाल स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जन-जागरूकता फैलाना था।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि आईएएस अनुराधा पाल, कार्यवाहक मिशन निदेशक, एनएचएम रहीं। मंच पर उनके साथ डॉ. आर. सी. पंत (निदेशक, डीजी हेल्थ सर्विसेज), डॉ. रश्मि पंत (निदेशक, एनएचएम), डॉ. मनोज शर्मा (मुख्य चिकित्साधिकारी, देहरादून) और डॉ. के. एस. भंडारी (सीएमएस, सीएचसी डोईवाला) मौजूद थे।

मुख्यमंत्री धामी ने दी बधाई

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्वास्थ्य विभाग को बधाई देते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी बच्चा ऐसी बीमारी से जान न गंवाए, जिसे समय पर पहचान और उपचार से रोका जा सकता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, समय पर पहचान और उपचार निमोनिया से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में किसी भी संसाधन की कमी नहीं रहने दी जाएगी।

जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा

कार्यवाहक मिशन निदेशक अनुराधा पाल ने कहा कि हर वर्ष हजारों बच्चों की जान निमोनिया की वजह से जाती है, जबकि यह बीमारी पूरी तरह रोकी जा सकती है। उन्होंने माता-पिता से बच्चों का समय पर टीकाकरण कराने और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
निदेशक एनएचएम डॉ. रश्मि पंत ने स्तनपान, पूरक आहार, साफ-सफाई और पीसीवी टीकाकरण को निमोनिया से बचाव का आधार बताया। कार्यक्रम में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों को पोषण किट वितरित की गईं।

“हर स्तर पर जागरूकता से ही बदलेगी तस्वीर” – स्वास्थ्य सचिव

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा कि अभियान को आशा, एएनएम, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों की मदद से घर-घर पहुँचाया जाएगा।
लक्ष्य है कि अगले एक वर्ष में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों में निमोनिया से मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सके।

सामुदायिक सहभागिता से सशक्त स्वास्थ्य व्यवस्था

डॉ. आर. सी. पंत ने कहा कि निमोनिया रोकथाम में समुदाय की सहभागिता बेहद महत्वपूर्ण है।
एसएचएसआरसी की सलाहकार डॉ. त्रिप्ती बहुगुणा ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी बताते हुए सभी स्तरों पर सहयोग की अपील की।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि बच्चों को समय पर उचित उपचार मिल सके।

पूरे राज्य में 12 नवंबर से चलेगा अभियान

घोषणा की गई कि ‘सांस अभियान 2025–26’ को 12 नवंबर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जाएगा।
इस अवधि में विशेष जागरूकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य शिविर, घर-घर आशा एवं एएनएम का भ्रमण, बच्चों में खतरे के लक्षणों की पहचान और Active Case Finding जैसी गतिविधियाँ आयोजित होंगी।
अभियान के चार मुख्य स्तंभ हैं — जागरूकता, शीघ्र पहचान, समय पर उपचार और टीकाकरण

हर बच्चे की सुरक्षित सांस, सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने संकल्प दोहराया है कि उत्तराखंड का कोई भी बच्चा निमोनिया जैसी रोकी जा सकने वाली बीमारी से अपनी सांस न गंवाए।
‘सांस अभियान 2025–26’ बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सामूहिक प्रयास है।

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