नज़दीकी बिंदुखत्ता के संजय नगर द्वितीय में स्थित श्री हंस प्रेम योग सतपाल महाराज आश्रम के भीतर मौजूद बिंदेश्वर महादेव मंदिर भक्तों के लिए आस्था और श्रद्धा का अद्वितीय केंद्र है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई पूजा कभी निष्फल नहीं जाती और व्यक्ति को उसका अभीष्ट प्राप्त होता है।
मंदिर की स्थापना की कहानी भी काफी रोचक है। युगसंत योगीराज श्री हंस जी महाराज के परम शिष्य महात्मा परमानंद जी 1960 के आसपास इस स्थान पर भ्रमण के दौरान आए। एक विशाल वृक्ष के नीचे ध्यान साधना करते समय उन्हें यहाँ किसी अलौकिक शक्ति का अनुभव हुआ। इसके बाद उन्होंने इस स्थान को अपनी तपस्थली बनाया और जगत जननी राज राजेश्वरी माताजी ने इस जगह पर शिवलिंग स्थापित कर मंदिर का मार्ग प्रशस्त किया। इस मंदिर को बिंदेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना गया।
मंदिर की स्थापना के बाद बिंदुखत्ता में बसावट भी शुरू हुई। धीरे-धीरे मंदिर की ख्याति दूर-दराज तक फैल गई और श्रद्धालु नियमित रूप से यहाँ शिव पूजन के लिए आने लगे। विशेष रूप से महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशाल मेला लगता है।
वर्ष 2022 में सदगुरुदेव श्री सतपाल महाराज जी के परम शिष्य महात्मा सत्यबोधानंद जी ने भक्तों और श्रद्धालुओं के सहयोग से मंदिर का सौंदर्यीकरण और जीर्णोद्धार कराया। मंदिर की लौकिक और अलौकिक आभा देखते ही बनती है। यहाँ आने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मुंह से अनायास ही निकलता है –






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