उत्तरकाशी। गर्मियां बढ़ते ही प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में जलसंकट गहराने लगा है। इस दौरान प्राकृतिक जलस्रोतों के सूखने व जलस्तर घटने से ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिसके चलते ग्रामीण रोजाना कई किलोमीटर दूर जाकर पानी ढोने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि, गर्मी बढ़ते ही परंपरागत नौले, धारे और प्राकृतिक स्रोत सूखने लगते हैं। जिससे पानी की किल्लत और अधिक बढ़ जाती है। कई स्थानों पर महिलाओं और बच्चों को घंटों मशक्कत कर पानी ढोना पड़ रहा है। हालांकि, जल निगम और जल संस्थान की ओर से टैंकरों के जरिए प्रभावित गांवों में पानी पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन बढ़ती आबादी और घटते जलस्रोतों के कारण समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान निकालने और पेयजल योजनाओं को मजबूत करने की मांग की है।
भटवाड़ी विकासखंड के संग्राली गांव में पिछले 20 दिन से पानी की आपूर्ति बदं होने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल निगम की ओर से करोड़ों की लागत से गजोली से संग्राली गांव के लिए पेयजल लाइन का निर्माण किया था। लेकिन इसके क्षतिग्रस्त होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
संग्राली गांव के जयकिशन भट्ट बताते हैं कि, गांव के लिए करोड़ों की लागत से बनाई गई पेयजल पाइपलाइन पर पानी की आपूर्ति ठप पड़ी हुई है। गांव के लिए वर्षों पुरानी पाइपलाइन पर भी जलस्रोत सूखने के कारण पानी की आपूर्ति बहुत कम हो रही है। इस कारण ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनको पानी के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता मधुकांत कोटियाल का कहना है कि पानी की लाइन क्षतिग्रस्त होने के कारण आपूर्ति बंद थी। वहां पर पाइपलाइन भेजी गई थी. अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी ली जा रही है।






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