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  • Written By: Admin
  • Published: March 25, 2026 11:14 AM IST
  • Updated: March 25, 2026 11:18 AM IST
उत्तराखंड

अल्मोड़ा का मां नंदा देवी मंदिर: आस्था, इतिहास और चमत्कार की अद्भुत कहानी

अल्मोड़ा में स्थित मां नंदा देवी मंदिर हजारों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां विराजमान मां नंदा देवी को शैलपुत्री का स्वरूप माना जाता है और चंद वंश के राजाओं की कुलदेवी के रूप में उनकी विशेष पूजा होती है।

इस मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और प्राचीन है। पुजारी तारा दत्त जोशी के अनुसार, वर्तमान मंदिर में माता की प्रतिमा की स्थापना करीब 200 साल पहले हुई, जबकि इससे पहले उनकी पूजा मल्ला महल में की जाती थी।

मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, मां नंदा देवी अपने भक्तों को सपने में दर्शन देती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि हर महीने यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

इतिहास के पन्नों में झांकें तो पता चलता है कि 1670 में बाज बहादुर चंद नंदा देवी की स्वर्ण प्रतिमा अल्मोड़ा लाए थे। इसके बाद 1699 में राजा ज्ञानचंद और 1710 में राजा जगत चंद ने भी प्रतिमा स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

वर्तमान मंदिर परिसर में 1690-91 में उद्योत चंद द्वारा बनाए गए उद्योत चंद्रेश्वर और पार्वती चंद्रेश्वर मंदिर भी स्थित हैं। अंग्रेजी शासनकाल में कमिश्नर ट्रेल द्वारा 1816 में वर्तमान नंदा देवी मंदिर का निर्माण कराया गया। कहा जाता है कि माता की कृपा से उनकी खोई हुई दृष्टि भी वापस आ गई थी।

मंदिर की वास्तुकला भी बेहद खास है। यहां की कलाकृतियां खजुराहो शैली से प्रभावित हैं और लकड़ी का छज्जा इसकी प्राचीनता को दर्शाता है। यह मंदिर संरक्षित श्रेणी में शामिल है।

अल्मोड़ा में मां नंदा देवी की पूजा तांत्रिक विधि से तारा शक्ति के रूप में की जाती है। इस परंपरा को पहले चंद शासकों द्वारा निभाया जाता था और आज भी उनके वंशज इस पूजा में भाग लेते हैं।

यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कार का अद्भुत संगम है, जो हर भक्त को अपनी ओर आकर्षित करता है।

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