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  • Written By: Admin
  • Published: July 28, 2026 01:52 PM IST
राज्य

भारी बारिश से अलकनंदा उफान पर,जलस्तर डेंजर लेवल के करीब पहंुचा

रुद्रप्रयाग। जिले में भारी बारिश के चलते अलकनंदा नदी उफान पर है। रुद्रप्रयाग मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित विश्वप्रसिद्ध कोटेश्वर महादेव गुफा मंदिर में उफनती मां अलकनंदा का जल पहुंच गया। श्रद्धालु इसे मां अलकनंदा द्वारा स्वयं भगवान शिव का जलाभिषेक मान रहे हैं।
लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और सामान्य दिनों में गुफा से काफी नीचे बहने वाली नदी का पानी पहली बार गुफा के भीतर तक पहुंच गया। गुफा में बहते जल और शिवलिंग के समीप पहुंचे अलकनंदा के प्रवाह ने ऐसा अलौकिक दृश्य प्रस्तुत किया कि वहां मौजूद श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस दुर्लभ दृश्य के साक्षी बनने के लिए कोटेश्वर महादेव पहुंच रहे हैं।
सावन के पवित्र महीने में सामने आए इस दृश्य को श्रद्धालु दिव्य संयोग और भगवान शिव की विशेष कृपा के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि मानो स्वयं मां अलकनंदा अपने आराध्य भगवान शिव का अभिषेक करने गुफा तक पहुंची हों। मंदिर परिसर में पूरे दिन श्हर-हर महादेवश् और बम-बम भोले के जयघोष गूंजते रहे। हालांकि, इस दिव्य आस्था के बीच प्रशासन ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लगातार बारिश के कारण अलकनंदा नदी डेंजर लेवल के करीब बह रही है। तेज बहाव के कारण श्रद्धालु नदी किनारे जाकर जल भरकर भगवान शिव का पारंपरिक जलाभिषेक भी नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन ने नदी के किनारे जाने से बचने और सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार हो रही भारी वर्षा के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने से पानी गुफा तक पहुंचा है। वहीं श्रद्धालुओं का मानना है कि विज्ञान अपनी जगह है, लेकिन सावन के पावन महीने में यह दृश्य उनके लिए गहरी आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिक अनुभूति का प्रतीक है।
कोटेश्वर महादेव मंदिर के महंत शिवानंद गिरि महाराज ने कहा कि, यह दृश्य अत्यंत दुर्लभ है। उनके अनुसार सावन में मां अलकनंदा का भगवान शिव के चरणों तक पहुंचना श्रद्धालुओं के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभूति का विषय है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपील की कि वे दर्शन के दौरान प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं का पालन करें और नदी के तेज बहाव के बीच किसी भी प्रकार का जोखिम न उठाएं।

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