ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: February 01, 2026 07:49 PM IST
  • Updated: February 01, 2026 07:53 PM IST
उत्तराखंड

चार श्रम संहिताओं के खिलाफ 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल में ऐक्टू की सभी यूनियनें पूरी ताकत से होंगी शामिल


* चार श्रम कोड के खिलाफ 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होंगी ऐक्टू से संबद्ध सभी यूनियनें 
* नयी चार श्रम संहिताएं मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करती हैं : जोगेंद्र लाल


श्रम संहिताओं को लागू किये जाने के खिलाफ और श्रम शक्ति नीति 2025 को वापस लिए जाने की मांग के लिए तथा मोदी सरकार द्वारा चार श्रम संहिताओं को अधिसूचित करने के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल को सफल करने के ऐक्टू द्वारा एक मीटिंग अपने कार्यालय में की गयी. तय किया गया कि ऐक्टू से संबद्ध सभी यूनियनें 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल में पूरी ताकत से शामिल होंगी.

ऐक्टू के जिला अध्यक्ष जोगेंद्र लाल ने कहा कि, 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल मुख्य रूप से चार चार लेबर कोड के खिलाफ है.  ये श्रम संहिताएं मजदूरों के संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन करती हैं. ये श्रम कोड जिसमें वेतन संहिता, 2019; व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य शर्त संहिता, 2020; सामाजिक सुरक्षा संहिता 2020; और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020- भले ही "श्रम सुधार" के नाम पर पेश की गयी हों पर ये अनिवार्य रूप से ऐसे औजार हैं जो "व्यापार करने की सुगमता" के आवरण के नीचे बड़े व्यवसाय और कॉरपोरेट हितों के मुनाफे के लिए आधुनिक गुलामी और शोषण को संहिताबद्ध करते हैं.

भाकपा माले नैनीताल जिला सचिव डॉ कैलाश पाण्डेय ने कहा कि, सभी के लिए सम्मानजनक और सही काम करने की स्थिति के संवैधानिक अधिकार पर मोदी सरकार हमला कर रही है. लेबर कोड्स, श्रम शक्ति नीति और वी बी ग्राम जी एक्ट के ज़रिए “ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस” के नाम पर मौजूदा लेबर फ्रेमवर्क और सुरक्षा को खत्म किया जा रहा है. साथ ही देश की मेहनतकश आबादी को बांटने के लिए नफरत और विभाजन को तेज किया जा रहा है. इसलिये देश के मेहनतकश लोगों ने लगभग पूरे ट्रेड यूनियन आंदोलन के जॉइंट प्लेटफॉर्म द्वारा बुलाई गई और संयुक्त किसान मोर्चा और खेत और ग्रामीण मज़दूरों की यूनियनों के प्लेटफॉर्म द्वारा समर्थित 12 फरवरी की आम हड़ताल को बड़ी कामयाबी बनाकर मज़दूरों और ट्रेड यूनियनों के खिलाफ़ मोदी सरकार के हमलों और विषैले प्रचार का मुँहतोड़ जवाब देने का पक्का इरादा कर लिया है.

वक्ताओं ने कहा कि, मोदी सरकार के लेबर कोड मजदूर वर्ग के बड़े हिस्से को बंधुआ मजदूरी जैसे हालात में धकेल देंगे और ठेकाकरण की राह को और सुगम बना देंगे. इन श्रम संहिताओं का उद्देश्य और लक्ष्य बड़े कॉरपोरेट की मुनाफाखोरी को सुगम बनाने के लिए मजदूरों के अधिकार और सुरक्षा को छीनना है. कुल मिलाकर ये श्रम संहिताएं मोदी सरकार के उस प्रतिगामी और मजदूर विरोधी चरित्र का प्रतिबिंब हैं, जो इस देश के मजदूरों और मेहनतकश आवाम को खून चूसने के मतलब का समझता है तथा उन्हें और अधिक गुलामी जैसी स्थितियों में धकेलने की कोशिश कर रहा है.

मीटिंग में जोगेंद्र लाल, डॉ कैलाश पाण्डेय, धन सिंह, दीपक कांडपाल, मनोज सिंह आर्य, मुकेश जोशी, विवेक ठाकुर,  प्रकाश सिंह, रवीन्द्र पाल सिंह, ललित जोशी, चंद्र सिंह आदि शामिल रहे।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×