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  • Written By: Admin
  • Published: July 07, 2026 01:27 PM IST
राज्य

आगामी विधानसभा चुनाव: भाजपा का बूथ मैनेजमैंट पर खास फोकस, 10 हजार कार्यकर्ता मैदान में उतारने की तैयारी

देहरादून। आगामी विधानसभा चुनाव को नजदीक देखकर  उत्तराखण्ड भाजपा ने अपने विभिन्न संगठनात्मक प्रकोष्ठों के माध्यम से 10 हजार से अधिक कार्यकर्ताओं की चुनावी फौज मैदान में उतारने की रणनीति तैयार कर ली है।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने प्रकोष्ठों की महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट संदेश दिया कि अब चुनाव केवल बड़े जनसभाओं या सोशल मीडिया से नहीं जीते जाएंगे, बल्कि बूथ, बस्ती और परिवार स्तर पर सतत संपर्क ही जीत की असली कुंजी होगा। उन्होंने सभी प्रकोष्ठों को मंडल और बूथ स्तर तक अपनी मजबूत इकाइयों का गठन शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। भाजपा की नई रणनीति पारंपरिक चुनाव प्रचार से आगे बढ़कर माइक्रो मैनेजमेंट पर आधारित दिखाई दे रही है। पार्टी चाहती है कि किसान, युवा, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, व्यापारी, पूर्व सैनिक, चिकित्सा, शिक्षा, विधि, आईटी और अन्य सामाजिक वर्गों से जुड़े प्रकोष्ठ सीधे अपने-अपने समाज के बीच सक्रिय रहें। भाजपा इस माडल के जरिए हर वर्ग तक अलग-अलग संदेश पहुंचाने की तैयारी कर रही है। इससे पार्टी को स्थानीय मुद्दों की जानकारी भी मिलेगी और संगठन की पकड़ भी मजबूत होगी।
बैठक में कार्यकर्ताओं से कहा गया कि वह सरकार की विकास योजनाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और पिछले वर्षों में हुए कार्यों को गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचाएं। यानी भाजपा का चुनावी नैरेटिव एक बार फिर विकास और डिलीवरी पर केंद्रित रहने वाला है। पार्टी का आकलन है कि यदि योजनाओं के लाभार्थियों से सीधे संवाद मजबूत हुआ तो सत्ता विरोधी माहौल को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
भाजपा की यह सक्रियता ऐसे समय सामने आई है जब कांग्रेस प्रदेशभर में संगठन विस्तार और परिवर्तन के संदेश के साथ कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुटी है। ऐसे में भाजपा का प्रकोष्ठ अभियान केवल संगठनात्मक कवायद नहीं, बल्कि विपक्ष की राजनीतिक सक्रियता का जवाब भी माना जा रहा है। दोनों दल अब जनसभाओं से ज्यादा कैडर आधारित चुनाव की तैयारी कर रहे हैं, जो पार्टी बूथ स्तर पर मजबूत होगी, वही चुनावी बढ़त हासिल कर सकती है।
भाजपा की कोशिश है कि प्रत्येक बूथ पर ऐसा कार्यकर्ता मौजूद हो, जो स्थानीय मतदाताओं से लगातार संपर्क बनाए रखे। यही वजह है कि प्रकोष्ठों को केवल औपचारिक संगठन नहीं, बल्कि चुनावी अभियान का सक्रिय हिस्सा बनाया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार आने वाले महीनों में प्रकोष्ठों के प्रशिक्षण शिविर, लाभार्थी सम्मेलन, सामाजिक संवाद कार्यक्रम और घर-घर संपर्क अभियान भी तेज किए जाएंगे। भाजपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू संगठन और सरकार के बीच समन्वय भी है। सरकार की योजनाओं का राजनीतिक लाभ तभी मिलेगा, जब संगठन उन्हें प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाए। यही कारण है कि इस बार संगठनात्मक ढांचे को पहले से अधिक सक्रिय बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

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