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  • Written By: Admin
  • Published: November 20, 2025 10:55 AM IST
उत्तराखंड

“पहाड़ों में खौफ का माहौल: गुलदार और हाथियों के बाद अब भालुओं ने दिखाई हिंसक हरकत”

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग हमेशा प्राकृतिक चुनौतियों और जोखिमों के बीच जीवन यापन करते आए हैं। मॉनसून में भूस्खलन और बारिश की समस्याएं आम हैं, लेकिन अब एक नई चुनौती पूरे साल लोगों की जान के लिए खतरनाक बन गई है – वन्यजीव और मानव के बीच बढ़ता संघर्ष।

प्रदेश के गढ़वाल क्षेत्र में गुलदार और बाघों के हमलों के बाद अब भालुओं की आक्रामकता ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी है। इस साल अब तक भालुओं के हमलों में 6 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

वन विभाग की रणनीति अक्सर एक जिले तक ही सीमित रहती है, लेकिन तब तक अन्य जिले भालुओं की सक्रियता का सामना कर रहे होते हैं।

हालिया घटना: पौड़ी गढ़वाल

17 नवंबर को पौड़ी गढ़वाल के बीरोंखाल ब्लॉक में 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी पर भालू ने हमला किया। वह रोज की तरह घास काटने गई थीं, लेकिन झाड़ियों में छिपा भालू अचानक उन पर टूट पड़ा। महिला की दाईं आंख और सिर पर गंभीर चोटें आईं। अन्य महिलाएं चीख-पुकार करने लगीं, जिससे भालू जंगल की ओर भाग गया। लक्ष्मी देवी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया और बेहतर उपचार के लिए उच्च केंद्र रेफर कर दिया गया।

वन्यजीवों के हमलों के आंकड़े

उत्तराखंड वन विभाग के अनुसार (2000–17 नवंबर 2025):

  • गुलदार: 546 मौतें, 2,126 घायल

  • हाथी: 230 मौतें, 234 घायल

  • बाघ: 106 मौतें, 134 घायल

  • भालू: 71 मौतें, 2,009 घायल

  • सांप: 260 मौतें, 1,056 घायल

  • जंगली सूअर: 30 मौतें, 663 घायल

  • बंदर: 211 घायल

  • ततैया: 10 मौतें, 16 घायल

  • मगरमच्छ: 9 मौतें, 44 घायल

ग्रामीणों की चिंता और मांगें

भालुओं और अन्य वन्यजीवों के लगातार हमलों के कारण ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और वन विभाग से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
उनकी मुख्य मांगें:

  • संभावित क्षेत्रों में वन विभाग की गश्त बढ़ाई जाए

  • हमलावर वन्यजीवों को पकड़ने के लिए पिंजरे लगाए जाएँ

  • मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएँ

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