ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: July 16, 2026 01:12 PM IST
राज्य

राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी जंग

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की औपचारिक घोषणा भले अभी बाकी हो, लेकिन सियासी तापमान अभी से चढ़ने लगा है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के प्रस्तावित कार्यक्रम को लेकर उठा विवाद अब केवल प्रशासनिक मसला नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे राजनीतिक संदेशों की लड़ाई में बदल गया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा राहुल गांधी की बढ़ती सक्रियता, युवाओं से उनके संवाद और बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई जैसे मुद्दों पर उनकी आक्रामकता से असहज है। छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर पैदा हुए विवाद ने उत्तराखंड की राजनीति में नया मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि राहुल गांधी का कार्यक्रम केवल एक सामान्य राजनीतिक गतिविधि था, तो फिर उसे लेकर इतनी असहजता क्यों दिखाई गई? पार्टी का दावा है कि सत्ता पक्ष को जनता के बीच राजनीतिक मुकाबला करना चाहिए, न कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के सहारे विपक्ष की आवाज को कमजोर करने की कोशिश करनी चाहिए।
कांग्रेस का आरोप है कि राहुल गांधी आज युवाओं, छात्रों, बेरोजगारों और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। पार्टी नेताओं के मुताबिक भाजपा को सबसे ज्यादा चिंता इसी बात की है कि राहुल गांधी इन सवालों को सीधे जनता के बीच ले जा रहे हैं। कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर दबाव और विपक्ष की राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश बता रही है। राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा के बाद उनकी राजनीतिक छवि में बड़ा बदलाव आया है। अब उन्हें कांग्रेस केवल राष्ट्रीय नेता के रूप में नहीं, बल्कि युवाओं और सामाजिक मुद्दों पर मुखर आवाज के तौर पर पेश कर रही है। उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहां बेरोजगारी, पलायन, भर्ती घोटाले और शिक्षा से जुड़े सवाल लगातार उठते रहे हैं, राहुल गांधी का कार्यक्रम भाजपा के लिए एक नई चुनौती माना जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा को डर है कि राहुल गांधी यदि छात्रों और युवाओं के बीच सीधे संवाद स्थापित करने में सफल रहे, तो चुनाव से पहले राजनीतिक नैरेटिव बदल सकता है। पार्टी का दावा है कि सत्ता पक्ष नहीं चाहता कि बेरोजगारी, महंगाई और पेपर लीक जैसे मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आएं, क्योंकि इससे सरकार के विकास दावों पर सवाल खड़े होंगे। दूसरी ओर भाजपा इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि भाजपा जैसी मजबूत संगठनात्मक पार्टी किसी एक नेता से भयभीत नहीं हो सकती। उनका तर्क है कि प्रशासनिक निर्णय कानून-व्यवस्था और व्यवस्था की जरूरतों के आधार पर लिए जाते हैं, लेकिन कांग्रेस हर बार उन्हें राजनीतिक रंग देकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश करती है।
फिर भी यह सच है कि उत्तराखंड में राहुल गांधी की मौजूदगी और उनकी बढ़ती राजनीतिक सक्रियता को भाजपा हल्के में नहीं ले रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी घोषणा से पहले यदि कांग्रेस ने राहुल गांधी को युवाओं और छात्रों के बीच लगातार सक्रिय रखा, तो इससे विपक्ष को एक नया राजनीतिक नैरेटिव मिल सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस इस पूरे विवाद को भाजपा की बेचैनी और डर की राजनीति के रूप में पेश कर रही है। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2027 की औपचारिक घोषणा से पहले यह टकराव और तेज होने के संकेत हैं। कांग्रेस राहुल गांधी को राज्य में परिवर्तन, सवाल और जनसरोकारों की आवाज के रूप में स्थापित करना चाहती है, जबकि भाजपा अपने संगठन, सरकार और विकास कार्यों के सहारे जवाब देने की तैयारी में है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी का उत्तराखंड दौरा भाजपा के लिए सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम है, या फिर चुनाव से पहले उभरता हुआ ऐसा सियासी खतरा, जिससे सत्ता पक्ष अभी से असहज दिख रहा है।




ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×