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  • Written By: Admin
  • Published: February 21, 2026 05:17 PM IST
  • Updated: February 21, 2026 05:18 PM IST
उत्तराखंड

तराई में ‘जंगल का राजा’ बेजान: पीपल पड़ाव में हाथी की संदिग्ध मौत, वन विभाग कटघरे में

तराई की धरती, जहां कभी हाथियों की चिंघाड़ से जंगल गूंज उठते थे, वहां शनिवार की सुबह एक सन्नाटा पसरा था। पीपल पड़ाव रेंज के तिलपुरी गांव में एक विशालकाय हाथी मिट्टी के ढेर की तरह बेजान पड़ा मिला। सवाल केवल एक वन्यजीव की मौत का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था का है, जो सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे तो करती है, मगर जमीनी हकीकत में कमजोर साबित होती दिख रही है।

ग्रामीणों के शोर के बाद जागा महकमा

बताया जा रहा है कि हाथी के मृत पड़े होने की जानकारी विभाग को तब मिली, जब ग्रामीणों ने शोर मचाया। इसके बाद आनन-फानन में क्षेत्र की घेराबंदी कर दी गई। सवाल उठ रहे हैं कि आधुनिक तकनीक, गश्त और निगरानी के दावों के बीच इतना बड़ा वन्यजीव दम तोड़ दे और विभाग को भनक तक न लगे—क्या यह गंभीर चूक नहीं?

जांच पर उठे सवाल

तराई केंद्रीय वन प्रभाग रुद्रपुर डिवीजन के अंतर्गत आने वाली इस रेंज में एसडीओ शशि देव सिंह और रेंज अधिकारी पूरनचंद जोशी की मौजूदगी में जांच की जा रही है। वहीं डीएफओ उमेश चंद तिवारी ने प्रारंभिक तौर पर बीमारी या आपसी संघर्ष की आशंका जताई है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अगर विभाग सतर्क रहता, तो शायद यह स्थिति न बनती।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और साक्ष्य जुटाने का दावा किया जा रहा है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया जारी है। अंतिम रिपोर्ट से ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

साख पर सवाल

तिलपुरी के ग्रामीणों में दहशत और आक्रोश है। उनका कहना है कि वन विभाग हर घटना के बाद सतर्कता की सलाह देता है, लेकिन रोकथाम की ठोस व्यवस्था नजर नहीं आती।

यह घटना केवल एक हाथी की मौत नहीं, बल्कि वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था की परीक्षा है। अब देखना यह है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सच उजागर करती है या सवालों का यह सिलसिला और लंबा खिंचता है।

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