नैनीताल में सीवेज समस्या को दूर करने के लिए शुरू की गई ₹110 करोड़ की पाइपलाइन और एसटीपी परियोजना में भारी अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जहां परियोजना के तहत 900 एमएम डायामीटर के नए DI (मेटल) पाइप लगाए जाने थे, वहाँ ठेकेदार ने 1982 में डाले गए पुराने 600 एमएम RCC पाइप को ही अंदर से रिपेयर कर उपयोग में ले लिया। इस धोखाधड़ी के कारण पाइप का व्यास बढ़ने के बजाय और भी कम हो गया तथा शहर में सीवर ओवरफ्लो की समस्या जस की तस बनी हुई है।
मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी नैनीताल ललित मोहन रयाल ने एक जांच समिति गठित कर विस्तृत जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं। यह मामला अब प्रशासनिक स्तर पर प्राथमिकता में लिया गया है।
यह परियोजना उत्तराखंड इंटीग्रेटेड एंड रेजीलियेंट अर्बन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट (UIRUDP) के तहत 4 वर्ष पूर्व शुरू की गई थी।
मुख्य बिंदु:
योजना का मकसद मॉल रोड से रूसी गांव बाईपास तक सीवर लाइन डालना और नई STP का निर्माण था।
परियोजना का कॉन्ट्रैक्ट तिरुपति सीमेंट प्रोडक्ट्स को ₹96.15 करोड़ में दिया गया था।
कुल लागत लगभग ₹110 करोड़ बताई गई।
परियोजना नवंबर 2021 से मई 2025 तक पूर्ण होनी थी।
पूर्ण होने पर नई STP की क्षमता17.50 MLD तय की गई थी।
1982 में 10,000 की आबादी को ध्यान में रखते हुए 600 एमएम RCC पाइपलाइन डाली गई थी।
लेकिन 2022–23 में वर्तमान जनसंख्या (2–5 लाख) के अनुसार 900 एमएम DI पाइप लगाने का टेंडर जारी किया गया था।
आरोप यह है कि:
ठेकेदार ने 900 mm नए पाइप नहीं लगाए,
बल्कि 600 mm की पुरानी पाइपों को ही अंदर से रीलाइनिंग कर दिया,
इससे पाइप का व्यास लगभग 2 सेमी कम हो गया,
जिससे सीवेज की क्षमता बढ़ने के बजाय और घट गई।
इसके चलते मॉल रोड और कई हिस्सों में सीवर ओवरफ्लो की समस्या लगातार बनी रही।
नई STP पर 70% तक काम हो चुका था, लेकिन अचानक सामने आए भारी भूस्खलन के कारण निर्माण रोक दिया गया।
अब प्रशासन STP लगाने के लिए नए स्थान की तलाश कर रहा है।
स्थानीय निवासी इस पूरे प्रकरण को खुला भ्रष्टाचार मानते हुए सरकार और प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
DM द्वारा जांच के आदेश जारी होने के बाद अब मामले में आगे की कार्रवाई का इंतज़ार है।






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