लालकुआं की गलियों में इन दिनों एक खामोश खतरा तेजी से फैल रहा है—अवैध कच्ची शराब का कारोबार। यह सिर्फ एक गैरकानूनी धंधा नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा गंभीर संकट बनता जा रहा है।
एक ओर जहां लालकुआं कोतवाली पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, शराब माफियाओं को पकड़ रही है और भारी मात्रा में कच्ची शराब जब्त कर रही है, वहीं दूसरी ओर आबकारी विभाग की चुप्पी लोगों को हैरान कर रही है। सवाल उठना लाजमी है—जब पुलिस अपना काम कर रही है, तो जिम्मेदार विभाग आखिर क्यों पीछे हट रहा है?
स्थानीय लोगों के दिल में डर और गुस्सा दोनों है। उनका कहना है कि ये धंधा अब छोटे स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक बड़े संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। हर बार कुछ लोगों की गिरफ्तारी होती है, लेकिन असली सरगना अब भी खुलेआम घूम रहे हैं।
सबसे चिंता की बात यह है कि अगर इस पर समय रहते रोक नहीं लगी, तो जहरीली शराब से किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे हादसे पहले भी कई जगहों पर निर्दोष लोगों की जान ले चुके हैं—क्या लालकुआं भी उसी दिशा में बढ़ रहा है?
लोगों की मांग साफ है—सिर्फ दिखावटी कार्रवाई नहीं, बल्कि जड़ से इस अवैध कारोबार को खत्म किया जाए। शराब बनाने वाले अड्डों को खोजकर पूरी चेन को तोड़ा जाए।
अब नजरें टिकी हैं आबकारी विभाग पर—क्या वह जागेगा और अपनी जिम्मेदारी निभाएगा, या फिर यह खामोशी किसी बड़े हादसे का कारण बनेगी?






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