कुमाऊँ मंडल के आयुक्त दीपक रावत अपनी कार्यशैली और औचक निरीक्षणों के लिए जाने जाते हैं। इसी क्रम में उन्होंने अल्मोड़ा कलेक्ट्रेट का गहन निरीक्षण किया, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था।
आयुक्त ने कलेक्ट्रेट के विभिन्न पटलों का जायजा लिया और अधिकारियों को 'जवाबदेही' का पाठ पढ़ाया:
कोर्ट केसों में नो टॉलरेंस: कलेक्टर कोर्ट में लंबित वादों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय में देरी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निस्तारण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
रिकॉर्ड रूम का कायाकल्प: आयुक्त ने रिकॉर्ड रूम के अवलोकन के दौरान आजादी से पूर्व के ऐतिहासिक दस्तावेजों को अलग से सुरक्षित रखने और उनके डिजिटलीकरण (Digitization) के निर्देश दिए।
स्मार्ट मैनेजमेंट: अभिलेखों को आसानी से खोजने के लिए उन पर वर्षवार स्टीकर लगाने और सुव्यवस्थित रखरखाव पर जोर दिया गया।
कलेक्ट्रेट पहुँचने पर जिलाधिकारी अंशुल सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा और अपर जिलाधिकारी युक्ता मिश्र ने आयुक्त का स्वागत किया। आयुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि वे अधीनस्थ न्यायालयों में चल रहे मामलों की नियमित मॉनिटरिंग (निगरानी) स्वयं करें।
निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा आमजन को दी जा रही सेवाओं की समीक्षा था। आयुक्त ने स्पष्ट किया कि:
"जनसेवा में संवेदनशीलता और जवाबदेही प्रशासन की प्राथमिक पहचान होनी चाहिए। सरकारी योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से हर नागरिक तक पहुँचना चाहिए।"
निष्कर्ष: सुशासन की ओर बढ़ते कदम
दीपक रावत का यह निरीक्षण केवल एक रूटीन चेकअप नहीं था, बल्कि अल्मोड़ा के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सक्रिय और जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की एक ठोस कोशिश है। डिजिटलीकरण और पुराने रिकॉर्ड्स के संरक्षण से आने वाले समय में आम जनता को अपने दस्तावेजों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।






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