अगलाड़ यमुना घाटी विकास मंच द्वारा टोल स्थित कार्यालय में पारंपरिक बग्वाली बूढ़ी दीपावली बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में लोग पारंपरिक वेशभूषा में पहुँचे और ढोल-दमाऊ जैसे वाद्य यंत्रों की थाप पर जमकर नृत्य किया। इस दौरान लोगों ने एक-दूसरे को बूढ़ी दीपावली की शुभकामनाएँ भी दीं।
कार्यक्रम में विभिन्न खेल प्रतियोगिताएँ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और पारंपरिक स्थानीय व्यंजनों का वितरण भी किया गया।
जौनपुर–जौनसार क्षेत्र में दीपावली एक माह बाद मनाने की परंपरा है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम के वनवास से अयोध्या लौटने की सूचना पहाड़ों तक एक माह देर से पहुँची थी, जिसके बाद यहाँ दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई और इसे बग्वाली बूढ़ी दीपावली कहा जाता है।
कार्यक्रम में मौजूद नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि यह पर्व स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने बताया कि जौनपुर और रवांई के साथ-साथ क्षेत्र के सभी समुदाय इस पर्व में उत्साहपूर्वक हिस्सा लेते हैं और इसे सदियों से पारंपरिक तरीके से मनाते आ रहे हैं।






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