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  • Written By: Admin
  • Published: December 16, 2025 05:16 PM IST
  • Updated: December 16, 2025 05:17 PM IST
उत्तराखंड

बिना कोचिंग बनी फ्लाइंग ऑफिसर: सोमेश्वर की बेटी ने बढ़ाया उत्तराखंड का मान

वीरों की भूमि कही जाने वाली सोमेश्वर घाटी का नाम एक बार फिर पहाड़ की बेटी ने रोशन किया है। सोमेश्वर की बेटी मेनका भोजक ने एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर न सिर्फ सोमेश्वर बल्कि पूरे उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। बेटी के ऑफिसर बनने पर परिवार में खुशी का माहौल है और लोग उनके घर बधाई देने पहुंच रहे हैं।

सुतोली गांव की निवासी हैं मेनका भोजक

मूल रूप से अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर तहसील के सुतोली गांव की निवासी और वर्तमान में हल्द्वानी के ऊंचापुल क्षेत्र में रहने वाले कैप्टन बीएस भोजक की बेटी मेनका भोजक एयरफोर्स में फ्लाइंग ऑफिसर बनी हैं। उनकी इस उपलब्धि से हल्द्वानी से लेकर सोमेश्वर तक खुशी का माहौल है।

जानकारी देते हुए पिता कैप्टन बीएस भोजक ने बताया कि मेनका बचपन से ही मेधावी रही हैं। उनकी शुरुआती शिक्षा पिथौरागढ़ से हुई। इसके बाद 10वीं और 12वीं की पढ़ाई उन्होंने पुणे से पूरी की और आगे बीकॉम किया।

परिवार में देशभक्ति का माहौल

परिवार में देशभक्ति का माहौल देखकर मेनका के मन में भी देशसेवा की ललक जगी। उनके दादा स्व. नीत सिंह सेना से सेवानिवृत्त थे। पिता कैप्टन बीएस भोजक देशसेवा में तत्पर हैं। ताऊ राजेंद्र सिंह भोजक 17 कुमाऊं रेजीमेंट से सेवानिवृत्त हैं और चाचा सूबेदार के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में बचपन से ही परिवार की सैन्य परंपरा और सेवाभाव को देखकर मेनका के मन में भी देशसेवा की लौ जल उठी।

अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेनका ने बिना किसी कोचिंग के करीब 400 यूट्यूब चैनलों की मदद से एयरफोर्स की तैयारी शुरू की। वह दो बार लिखित परीक्षा में सफल रहीं, लेकिन एसएसबी में बाहर हो गईं। तीसरे प्रयास में उन्होंने सफलता हासिल की और गुजरात से टॉपर रहीं। इसके बाद 27 सितंबर 2024 को उनका चयन एयरफोर्स में हुआ। उनकी ट्रेनिंग हैदराबाद में पूरी हुई। 13 दिसंबर को मेनका ने परेड में अंतिम पग भरते हुए सोमेश्वर का नाम रोशन किया।

80 साल की दादी पहुंचीं हैदराबाद

इस खुशी के मौके पर मेनका के पिता कैप्टन बीएस भोजक, माता हीरा देवी, दादी और भाई ने उनके कंधों पर स्टार सजाए। इस दौरान पूरे परिवार ने गर्व की अनुभूति की। इसके बाद परिवार अपने मूल गांव सुतोली, सोमेश्वर पहुंचा, जहां ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया।

मेनका की सफलता से सबसे ज्यादा खुश उनकी दादी नजर आईं, जो 80 साल की उम्र में पोती को वर्दी में देखने हैदराबाद पहुंचीं। मेनका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया है।

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