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  • Written By: Admin
  • Published: March 26, 2026 01:06 PM IST
  • Updated: March 26, 2026 01:07 PM IST
उत्तराखंड

सुसाइड नोट नहीं, दर्द की दास्तां: देहरादून में युवा डॉक्टर तन्वी ने कार में ड्रिप लगाकर दी जान, HOD पर परेशान करने का आरोप।

राजधानी देहरादून की सड़कों पर जब सन्नाटा पसर रहा था, तब एक कार के भीतर एक युवा जिंदगी धीरे-धीरे मौत की आगोश में समा रही थी। डॉ. तन्वी, जो दूसरों की जान बचाने का हुनर रखती थीं, उस रात खुद अपनी ही सांसों की डोर काट बैठीं।

डॉ. तन्वी ने अपनी कार की ड्राइविंग सीट पर बैठकर ऊपर हैंडल से 100 एमएल की एक बोतल लटकाई। उसमें पोटेशियम क्लोराइड ($KCl$) के चार इंजेक्शन मिलाए और दाहिने हाथ में लगी कैनुला से जोड़ दिया। घंटों तक मौत की एक-एक बूंद उनके जिस्म में उतरती रही। जब तक कोई मदद पहुंचती, इंजेक्शन की ओवरडोज ने उनकी धड़कनों को थाम लिया था।

मृतका के पिता ललित मोहन ने बताया कि तन्वी ने मंगलवार रात उनसे बात की थी। उसके शब्दों में हताशा थी और रूह में थकान। उसने कहा था, "पापा, अब और बर्दाश्त नहीं होता... आप अंबाला से देहरादून आ जाओ, अब HOD की शिकायत करेंगे।" पिता ने ढांढस बंधाया, सुबह आने का वादा किया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

रात 11:15 बजे मां को मैसेज आया कि "देर से आऊंगी।" यही वो आखिरी शब्द थे जिसने परिवार के मन में अनहोनी का डर पैदा कर दिया। पिता अंबाला से भागे-भागे देहरादून पहुंचे, मां के साथ मिलकर बेटी को ढूंढना शुरू किया। कारगी रोड के पास शनि मंदिर के पास खड़ी कार में जब उन्होंने पत्थर से शीशा तोड़ा, तो अंदर उनकी दुनिया उजड़ चुकी थी।

सवाल जो पीछे छूट गए

सीट पर पड़े खाली इंजेक्शन और खत्म हो चुकी ड्रिप की बोतल इस बात की गवाह थी कि तन्वी ने यह कदम बेहद शांत रहकर लेकिन गहरी मानसिक पीड़ा में उठाया। आखिर एक डॉक्टर को मौत को गले लगाने के लिए इतना मजबूर किसने किया? क्या मेडिकल प्रोफेशन का दबाव और वरिष्ठों का व्यवहार एक और जान लेने के लिए जिम्मेदार है?

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