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  • Written By: Admin
  • Published: November 17, 2025 04:23 PM IST
उत्तराखंड

“सुविधा शुल्क न भरने से आढ़तियों को नहीं मिल रही दुकानें, शहर में बढ़ा असंतोष”

रुद्रपुर: पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने नई अनाज मंडी में दुकानों के आवंटन को लेकर मंडी परिषद पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ठुकराल का कहना है कि संबंधित अधिकारी दुकानों के आवंटन के नाम पर लाखों रुपये की मांग कर रहे हैं, जिसके कारण पूरा मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है।

सुविधा शुल्क की बढ़ती मांग

ठुकराल ने बताया कि दिल्ली रोड स्थित ए-एन-झा कॉलेज की भूमि पर निर्मित नई अनाज मंडी में दुकानों के आवंटन के लिए पहले 15 लाख, फिर 12 लाख, उसके बाद 8 लाख और अब 4 लाख रुपये ‘सुविधा शुल्क’ की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि करोड़ों की लागत से तैयार रुद्रपुर की नई अनाज मंडी लंबे समय से खाली पड़ी हुई है।

मंडी की स्थिति और अधिकारियों की उदासीनता

ठुकराल ने कहा कि दुकानों के जर्जर शटर और खराब हो रही संरचना सरकार की उदासीनता व अधिकारियों की मनमानी को दर्शाती है। उनकी पहल पर शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में रुद्रपुर गल्ला मंडी के आढ़तियों को आज तक दुकानों के ब्लॉक आवंटित नहीं किए गए हैं।

पूर्व विधायक ने बताया कि अपने कार्यकाल में उन्होंने रुद्रपुर गल्ला मंडी तराई चौंबर मर्चेंट्स के कार्यालय भवन का निर्माण करवाया था। इसके लोकार्पण के दौरान आढ़तियों और व्यापारियों की मांग को देखते हुए उन्होंने ए-एन-झा कॉलेज की 26 एकड़ भूमि को शासन से हस्तांतरित कराकर कृषि उत्पादन मंडी परिषद के माध्यम से 118 डबल शटर दुकानों का निर्माण कराया था।

कृषि और व्यापार के लिए महत्व

ठुकराल ने कहा कि यह मंडी उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की सीमा के मध्य होने के कारण दोनों राज्यों के किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। इससे किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा और सरकार को दुकानों के किराये व अन्य मदों में राजस्व वृद्धि होगी।

मंडी परिषद पर असंतोष

उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी परिषद की ओर से बार-बार सुविधा शुल्क मांगे जाने की चर्चाओं ने न केवल दुकानदारों में असंतोष बढ़ाया है बल्कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की छवि पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

मांग और चेतावनी

ठुकराल ने मांग की है कि मंडी परिषद बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के आढ़तियों को जल्द से जल्द दुकानों का आवंटन करे। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिलाधिकारी, मंडी परिषद के एमडी और संबंधित अधिकारी तत्काल स्थलीय निरीक्षण कर कार्रवाई नहीं करते, तो वे मंडी परिषद के मुख्य द्वार पर धरना देने को बाध्य होंगे।

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