उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर नियमविरुद्ध कर्मचारियों की पदोन्नति की गई थी। इसके अलावा, जो पद विश्वविद्यालय में स्वीकृत नहीं थे, उन पर भी भर्तियां की गईं। यही नहीं, कई तरह के निर्माण कार्य भी विश्वविद्यालय में कराए गए, जिनकी अनुमति शासन से नहीं ली गई थी।
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब विजिलेंस करेगी। शासन की मांग पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजिलेंस से खुली जांच कराने की अनुमति दी है। ये अनियमितताएं प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों के दुरुपयोग के माध्यम से की गईं। इसमें कुल 13.10 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं।
यह मामला वित्तीय विभाग की जांच में सामने आया। जांच में पाया गया कि कुल 13.10 करोड़ रुपये की गड़बड़ी विभिन्न कार्यों में की गई है, जिनमें वेतन भुगतान से लेकर निर्माण कार्यों तक के खर्च शामिल हैं।
शासन ने इस मामले में विजिलेंस जांच की संस्तुति की थी। इसे विजिलेंस जांच की अनुमति के लिए शुक्रवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने रखा गया था। मुख्यमंत्री ने खुली विजिलेंस जांच की अनुमति देते हुए पत्रावली पर अनुमोदन भी प्रदान कर दिया है। जल्द ही इस मामले में विजिलेंस जांच शुरू की जाएगी।
गौरतलब है कि आयुर्वेद विश्वविद्यालय पहले भी कई बार विवादों में रहा है।






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