देहरादून के राजकीय दून मेडिकल कॉलेज में आज विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित 'मातृ संस्कार समागम' में संस्कृति और संस्कारों का शंखनाद हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवसर पर प्रदेशभर से आई मातृशक्ति को नमन करते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भावुक नजर आए और उन्होंने अपने बचपन के संघर्षों को साझा किया। उन्होंने कहा:
"मेरा जीवन किसी विशेष सुविधा से नहीं, बल्कि अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है।"
सीमित संसाधनों में बड़े सपने देखना और उन्हें पूरा करना ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत रही है।
मुख्यमंत्री ने वर्तमान समय में एकल परिवारों (Nuclear Families) के बढ़ते चलन और संवाद की कमी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने 'कुटुंब प्रबोधन' का मंत्र देते हुए कहा कि:
परिवार ही वह पहला विद्यालय है जहाँ बच्चा अनुशासन और राष्ट्रभाव सीखता है।
आधुनिक जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के बीच परिवार की मूल भावना—त्याग और सहयोग—को बचाए रखना अनिवार्य है।
कार्यक्रम में श्रीमती गीता धामी ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि माँ केवल स्नेह की प्रतिमूर्ति नहीं, बल्कि समाज की आधारशिला है। उन्होंने परिवारों से अपील की कि वे अपनी अगली पीढ़ी को केवल डॉक्टर या इंजीनियर ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील नागरिक भी बनाएं।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली 7 महिलाओं को सम्मानित किया:
श्रीमती ममता राणा
श्रीमती ममता रावत
सुश्री शैला ब्रिजनाथ
साध्वी कमलेश भारती
श्रीमती राजरानी अग्रवाल
श्रीमती मन्जू टम्टा
सुश्री कविता मलासी
संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित यह समागम केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के पुनर्जागरण की एक नई दिशा है। मुख्यमंत्री का यह संदेश स्पष्ट है—"यदि परिवार सशक्त होगा, तो राष्ट्र स्वयं ही सशक्त हो जाएगा।"






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