पटना: बिहार में दो चरणों के तहत विधानसभा चुनाव संपन्न हो गया। इसके साथ ही आज 14 नवंबर को सुबह 8 बजे से मतों की गणना शुरू हो गई। सुबह से ही एनडीए लगातार बढ़त बनाए हुए है, जबकि महागठबंधन को इस बार चुनाव में मुंह की खानी पड़ी है। चुनाव से पहले विपक्ष के सबसे बड़े नेता और सीएम पद के दावेदार तेजस्वी यादव लगातार बड़े-बड़े वादे कर रहे थे। नौकरी देने से लेकर महिलाओं के खाते में रुपये भेजने तक के तमाम दावे जमीन पर नहीं उतर पाए। ऐसे में यह सवाल उठने लगे हैं कि तेजस्वी यादव की रणनीति आखिर कहां फेल हो गई।
तेजस्वी यादव की रणनीति फेल होने को लेकर कई तरह की बातें सामने आ रही हैं। यहां हम उन पांच मुख्य कारणों का उल्लेख कर रहे हैं, जिन्हें उनकी हार की बड़ी वजह माना जा रहा है—
तेजस्वी ने कांग्रेस को महागठबंधन में शामिल कर बड़ी गलती कर दी। कांग्रेस बिहार में कमजोर आधार वाली पार्टी है। कई सीटों पर कांग्रेस ने आरजेडी के परंपरागत वोटों में ही सेंध लगाई। सीट शेयरिंग में कांग्रेस को अधिक सीटें देना आरजेडी को महंगा पड़ा, क्योंकि ज्यादातर सीटों पर वह हार रही है।
तेजस्वी ने सीट बंटवारे में कांग्रेस हाईकमान को खुश करने में काफी समय बर्बाद किया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की मंजूरी के इंतजार में वे महीनों उलझे रहे। इस दौरान जमीनी तैयारी कमजोर पड़ गई। कई मजबूत सीटें कांग्रेस को दे दी गईं, जहां खुद आरजेडी आसानी से जीत सकती थी।
तेजस्वी ने मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी को 10 से अधिक सीटें दे दीं और डिप्टी सीएम पद तक ऑफर कर दिया। जबकि सहनी का प्रभाव सीमित इलाकों तक ही है। इस कदम से तेजस्वी ने अपने कोर वोट बैंक (यादव–मुस्लिम) को नाराज़ कर दिया।
तेजस्वी ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे असली मुद्दों से ध्यान हटाकर ‘वोट चोरी’, ‘ईवीएम हैकिंग’ जैसे आरोपों पर ज्यादा जोर दिया। इससे जनता का ध्यान भटक गया और एनडीए प्रचार में इसे इस्तेमाल कर कहने लगा कि “आरजेडी हार मान चुकी है।”
इस बार महिलाओं ने रिकॉर्ड संख्या में मतदान किया। नीतीश कुमार की शराबबंदी, साइकिल योजना, महिला आरक्षण जैसी योजनाओं का सीधा लाभ जेडीयू–बीजेपी को मिला। आरजेडी की ‘10 लाख नौकरी’ वाली घोषणा महिलाओं तक प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पाई। ग्रामीण इलाकों की महिलाओं ने सुरक्षा और योजनाओं के आधार पर एनडीए के पक्ष में मतदान किया।






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