Dehradun। चर्चित Ankita Bhandari murder case में न्याय की लड़ाई अब एक नए मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है।
‘मूल निवास भू-कानून संघर्ष समिति’ के संस्थापक संयोजक Mohit Dimri ने उत्तराखंड सरकार की हालिया नियुक्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami पर निशाना साधते हुए पारदर्शिता को लेकर चिंता जताई है।
विवाद का केंद्र भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता Gaurav Bhatia को राज्य सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में ‘वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता’ नियुक्त किया जाना है। मोहित डिमरी का आरोप है कि यह नियुक्ति अंकिता भंडारी केस में कथित ‘वीआईपी’ को बचाने की कोशिश का हिस्सा हो सकती है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या उत्तराखंड में योग्य और वरिष्ठ वकीलों की कमी थी, जो राज्य से बाहर के व्यक्ति को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके अनुसार, इससे स्थानीय प्रतिभाओं की अनदेखी होती है और यह राज्य के सम्मान से जुड़ा मुद्दा भी है।
डिमरी ने यह भी दावा किया कि जिस ‘वीआईपी’ (Dushyant Gautam) का नाम एक कथित ऑडियो वायरल होने के बाद सामने आया था, उसी मामले में गौरव भाटिया पहले निजी वकील के रूप में पेश हो चुके हैं। ऐसे में उन्होंने इस नियुक्ति के समय और परिस्थितियों पर सवाल खड़े किए हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार एक ओर ‘देवभूमि’ में बेटियों की सुरक्षा की बात करती है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के फैसले जनता के बीच गलत संदेश दे सकते हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से इस मामले में अभी तक विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मुद्दा अब राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बनता जा रहा है।
यह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर इस बात को रेखांकित करता है कि संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना कितना जरूरी है, ताकि जनता का विश्वास कायम रह सके।






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