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  • Written By: Admin
  • Published: November 22, 2025 01:10 PM IST
उत्तराखंड

आचार्य ममगांई का आध्यात्मिक संदेश—‘जीव माया की सीमाओं में नियंत्रित’

देहरादून। मन्दाकिनी विहार सहस्त्रधारा रोड पर शर्मा बंधुओं द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिवस पर ज्योतिष्पीठ व्यास पदालंकृत आचार्य शिवप्रसाद ममगांई ने ईश्वर और जीव के तत्त्व पर गहन आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान किया। आचार्य ने कहा कि ईश्वर सर्वव्यापक है, जबकि जीव माया के सीमित दायरे में बंधा हुआ है।

ईश्वर–जीव तत्त्व का विस्तृत वर्णन

आचार्य ममगांई ने कहा कि जीव एक समय में केवल एक स्थान पर ही रह सकता है, जबकि ईश्वर हर समय हर जगह विद्यमान है।
उन्होंने बताया:

  • जीव काल, देश, अवस्था और परिस्थिति के अधीन होता है।

  • ईश्वर मायापति होने से सर्वव्यापी है।

  • शुद्ध ब्रह्म जब माया से संयुक्त होता है तो ईश्वर बनता है और इसी के पश्चात जीव तथा जगत की रचना होती है।

  • सृष्टि में सक्रिय रहते हुए भी ईश्वर अकर्ता, निष्काम और अपने सच्चिदानंद स्वरूप में स्थित रहता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि तिनोगुणों से परे सतोगुणी माया पर पड़ने वाला चैतन्य ही ईश्वर कहलाता है, इसलिए ईश्वर सतोगुणी माया की उपाधि वाला है, लेकिन स्वभाव से वह ब्रह्म ही है।

जीव और ब्रह्म का संबंध

आचार्य ने कहा कि

  • ब्रह्म जब अविद्या की उपाधि धारण करता है, तो जीव बन जाता है।

  • यदि जीव अविद्या रूपी अज्ञान को काट दे तो वह तत्वतः ब्रह्म स्वरूप हो जाता है।

  • आत्मा का साक्षात्कार कर लेने पर जीव अपने सच्चिदानंद स्वरूप को प्राप्त कर लेता है।

कलश यात्रा से हुआ प्रथम दिवस का शुभारंभ

कथा के प्रथम दिनमन्दाकिनी विहार शिव मंदिर से महिलाओं की भव्य कलश यात्रा निकाली गई।
ढोल-दमाऊ की थाप के साथ सैकड़ों महिलाओं ने पीत वस्त्र धारण कर सर पर जलकलश रखकर शोभायात्रा निकाली और गोपाल जी का अभिषेक किया।

विशिष्ट अतिथि

कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित रहे—
ब्रह्म किशोर शर्मा, दिव्य वत्स शर्मा, श्रीमती प्रियंका शर्मा, शानवी नंदनी, डॉ. मधुकर मलेठा, वत्सला मलेठा, आचार्य अंकित ममगांई, आचार्य संदीप बहुगुणा, आचार्य हिमांशु मैठानी, आचार्य हर्ष मणि घिल्ड़ियाल, आचार्य जितेंद्र धस्माना, अनील चमोली, सुनील नौटियाल एवं सजेविणस आदि।

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