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  • Written By: Admin
  • Published: July 04, 2026 02:07 PM IST
राज्य

उत्तराखंड की सियासत चुनावी मोड़ में,कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। दोनों दल जनता के मुद्दों को लेकर एक-दूसरे पर हमलावर हैं। भाजपा जहां मुख्यमंत्री के नेतृत्व में विकास, समान नागरिक संहिता, निवेश, सड़क और धार्मिक पर्यटन को अपनी उपलब्धियों के रूप में जनता के सामने रख रही है, वहीं कांग्रेस बेरोजगारी, पलायन, महंगाई, स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और स्थानीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने में जुटी है।
भाजपा का कहना है कि प्रदेश में डबल इंजन सरकार ने विकास की नई इबारत लिखी है। पार्टी नेताओं का दावा है कि उत्तराखंड में बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, पर्यटन और निवेश के क्षेत्र में अभूतपूर्व काम हुआ है। भाजपा का पूरा फोकस लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य पर है। पार्टी संगठन बूथ स्तर तक अपनी तैयारियों में जुट गया है और विकास पखवाड़ा, जनसंपर्क अभियान तथा विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच अपनी उपलब्धियां पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार पर वादाखिलाफी और जन समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगा रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि प्रदेश में बेरोजगारी, पलायन और महंगाई जैसे मुद्दे लगातार बढ़े हैं और जनता अब जवाब मांग रही है।
कांग्रेस यह भी दावा कर रही है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में सत्तापक्ष के विधायकों का जनता द्वारा घेराव इस बात का संकेत है कि लोगों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। पार्टी इसे आगामी चुनाव में परिवर्तन की लहर की शुरुआत मान रही है। चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक बयानबाजी भी तीखी होती जा रही है। भाजपा कांग्रेस पर परिवारवाद, गुटबाजी और नेतृत्व संकट का आरोप लगा रही है, जबकि कांग्रेस भाजपा पर सत्ता के दुरुपयोग, जनभावनाओं की उपेक्षा और केवल प्रचार की राजनीति करने का आरोप मढ़ रही है।
प्रदेश की सियासत में अब मुद्दों के साथ-साथ व्यक्तिगत और वैचारिक हमले भी तेज होने लगे हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह जुबानी जंग और अधिक तीखी हो सकती है। भाजपा और कांग्रेस की सीधी लड़ाई के बीच क्षेत्रीय दल भी अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाशने में जुटे हैं। मूल निवास, भू-कानून और क्षेत्रीय अस्मिता जैसे मुद्दों पर कुछ दल जनता के बीच सक्रियता बढ़ा रहे हैं। हालांकि प्रदेश की मुख्य लड़ाई फिलहाल भाजपा और कांग्रेस के बीच ही दिखाई दे रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी बयानबाजी अपनी जगह है, लेकिन अंतिम फैसला जनता के मुद्दों पर ही होगा। रोजगार, पलायन, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पहाड़ के विकास जैसे विषय इस चुनाव के केंद्र में रहने वाले हैं। विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले शुरू हुई भाजपा और कांग्रेस की यह जुबानी जंग दरअसल आगामी चुनावी महासंग्राम का ट्रेलर है। आने वाले दिनों में आरोपों और प्रत्यारोपों की यह लड़ाई और तेज होगी, लेकिन जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि कौन-सी पार्टी उसके मुद्दों का ठोस समाधान प्रस्तुत करती है। उत्तराखंड की सियासत अब चुनावी मोड़ पर पहुंच चुकी है। चुनाव की तारीखों का ऐलान भले ही बाकी हो, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपने-अपने मोर्चे खोल दिए हैं और प्रदेश में चुनावी रण का शंखनाद लगभग हो चुका है।

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