देहरादून। बदरी केदार मंदिर समिति द्वारा दान के पैसों पर वीआईपी आवाभगत के मामले में अब जांच रिपोर्ट ही सवालों के घेरे में आ गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एक तरफ जांच रिपोर्ट में प्रकरण से जुड़े होटल, रेस्टोरेंट के दस्तावेजों को सत्यापित किए जाने की प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है, तो दूसरी तरफ जांच रिपोर्ट में भाजपा नेताओं को सफाई देने तक का मौका नहीं दिया गया। इस तरह आधी अधूरी जांच पर ही मंदिर समिति के तत्कालीन अधिकारियों को प्रथम दृष्टया गलत ठहरा दिया गया।बदरीनाथ और केदारनाथ मंदिर को लेकर यूं तो समय-समय पर तमाम विवाद सामने आते रहे हैं। लेकिन इस बार जिस तरह दान चोरी का प्रकरण सामने आया है, उसके बाद दूसरे तमाम मामलों से भी पर्दा उठने लगा है। हाल ही में केदारनाथ धाम में वीआईपी अतिथियों खासतौर पर भाजपा के नेताओं पर लाखों खर्च करने की बात सामने आई थी। जिस पर मंदिर समिति द्वारा जांच भी की जा चुकी है।
वैसे तो जांच रिपोर्ट में तत्कालीन सीईओ विजय थपलियाल के साथ ही तत्कालीन व्यवस्थापक और मुख्य प्रभारी अधिकारी को भी वित्तीय अनियमितता के लिए प्रथम दृष्टया गलत ठहरा दिया गया है। लेकिन जांच रिपोर्ट खुद यह कहती है कि इसमें अभी जांच के लिए ऐसे कई बिंदु हैं जिस पर जांच अधिकारियों द्वारा जांच ही नहीं की गई।
बड़ी बात यह है कि भाजपा के जिन नेताओं पर वीआईपी होने के नाते खर्च किया गया, उनसे भी जांच अधिकारियों द्वारा बयान नहीं लिए गए हैं। खुद केदारनाथ की विधायक आशा नौटियाल इस बात की पुष्टि करती हैं। उन्हांेने कहा कि बदरी केदार मंदिर समिति की तरफ से उन्हें बिल भुगतान को लेकर संपर्क नहीं किया गया और ना ही उनसे इस पर कोई बयान लिए गए।






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