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  • Written By: Admin
  • Published: July 14, 2026 04:40 PM IST
अपराध

बहुचर्चित सौरभ हत्याकांड का खुलासा,मृतक के तीन दोस्त गिरफ्तार

रुड़की। मंगलौर कोतवाली पुलिस ने सौरभ हत्याकांड का खुलासा कर दिया है। पुलिस ने इस बहुचर्चित हत्याकांड मामले में मृतक के तीन दोस्तों को गिरफ्तार किया है। सौरभ हत्याकांड ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब पुलिस की गहन विवेचना ने पूरी कहानी को उलटकर रख दिया। वहीं जिन लोगों को हत्या का आरोपी बनाकर कानून के शिकंजे में फंसाने की कोशिश की गई थी, जांच में वह पूरी तरह से निर्दोष पाए गए। मृतक के सबसे करीबी दोस्त ही इस पूरे घटनाक्रम के असली किरदार बनकर सामने आए, जिन्हें पुलिस ने जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया।

 11 जुलाई शनिवार शाम को सौरभ अपने तीन साथियों के साथ पुरानी रंजिश के चलते विरोधियों से भिड़ने की तैयारी में था और उसके पास 12 बोर का तमंचा भी था। बताया गया है कि हथियार को परखने और चलाने के दौरान अचानक से ट्रिगर दब गया और सीधे गोली सौरभ को जा लगी, जिसके बाद घायल सौरभ को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां पर डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं, घटना के बाद सौरभ के साथी घबरा गए और गलती छिपाने व पुरानी दुश्मनी का फायदा उठाने के लिए एक खतरनाक साजिश रच डाली। उन्होंने अनुज, रॉबिन और प्रदुम्न पर हत्या का आरोप लगाते हुए पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। निर्दोष लोग हत्या के मुकदमे में फंस जाएं और असली सच्चाई हमेशा के लिए दफन हो जाए, लेकिन मंगलौर कोतवाली पुलिस ने जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय हर पहलुओं पर मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच पड़ताल की। घटनास्थल की फॉरेंसिक पड़ताल, 112 पर की गई कॉल का विश्लेषण, मोबाइल लोकेशन, तकनीकी साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने झूठी कहानी की एक-एक परत खोल कर रख दी। आखिरकार पुलिस उस सच्चाई तक पहुंच गई, जिसे छिपाने की हर संभव कोशिश की गई थी। वहीं, जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने सुमित पुत्र सुखबीर निवासी शकरपुर (पुरकाजी) (उत्तर प्रदेश), डिम्पल पुत्र नाहर और आशीष पुत्र बिंदर निवासी मोहम्मदपुर जट्ट (कोतवाली मंगलौर) को गिरफ्तार कर लिया। इसी के साथ पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल 12 बोर का एक तमंचा और खोखा कारतूस भी बरामद कर लिया। वहीं, पुलिस की विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर हत्या की धारा में संशोधन करते हुए गैर-इरादतन हत्या समेत अन्य संबंधित धाराओं में कार्रवाई की, जिसके बाद तीनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश कर दिया गया। वहीं, इस पूरे मामले घटनाक्रम का खुलासा एसएसपी हरिद्वार नवनीत सिंह भुल्लर के निर्देशन में पुलिस अधीक्षक ग्रामीण शेखर चंद्र सुयाल, क्षेत्राधिकारी मंगलौर और प्रभारी निरीक्षक भगवान मेहर के नेतृत्व में गठित टीम ने किया। एसपी देहात शेखर चंद्र सुयाल का कहा कि दूसरों के लिए खड्डा खोदने वाले खुद ही उस खड्डे में दफन हो जाते हैं। पुलिस जांच में एक ऐसा ही मामला सौरभ हत्याकांड में सामने आया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच की तो सामने आया कि मृतक सौरभ अपने तीन अन्य साथियों के साथ पुरानी रंजिश के चलते विरोधियों से भिड़ने की तैयारी में था और उसके पास एक अवैध तमंचा भी था, इसी दौरान हथियार को परखने और चलाने के दौरान अचानक से उसका ट्रिगर दब गया और गोली सौरभ के जा लगी, जिससे उसकी मौत हो गई। घटना के बाद सौरभ के साथी घबरा गए और अपनी गलती छिपाने के लिए खतरनाक साजिश रच दी। पुरानी रंजिश के चलते उन्होंने अनुज, रॉबिन और प्रदुम्न पर हत्या का आरोप लगाया और पुलिस को गुमराह करने प्रयास किया गया, लेकिन पुलिस जांच में सच सामने आ गया। एसपी देहात ने कहा कि यदि तकनीकी साक्ष्यों और निष्पक्ष जांच पर भरोसा न किया जाता तो तीन निर्दोष लोग एक ऐसे अपराध में फंस जाते जो उन्होंने किया ही नहीं था।

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