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  • Written By: Admin
  • Published: March 10, 2026 01:56 PM IST
  • Updated: March 10, 2026 01:57 PM IST
उत्तराखंड

“हल्द्वानी में मार्च में ही पेयजल संकट! नदियों का जलस्तर गर्मियों जैसी स्थिति में

हल्द्वानी। लगातार बारिश न होने के कारण जीवनदायिनी नदियों का जलस्तर तेजी से घट रहा है। शहर की लाइफलाइन गौला नदी, कोसी और नंधौर नदियों में पानी मार्च में ही गर्मियों जैसी स्थिति में पहुंच गया है। सोमवार को गौला में 124 क्यूसेक, कोसी में 129 क्यूसेक और नंधौर में 56 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया। गौरतलब है कि यह जलस्तर आमतौर पर मई-जून की भीषण गर्मी में ही देखा जाता है।

जलस्तर में कमी की वजह से हल्द्वानी के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट की चेतावनी पहले ही सुनाई देने लगी है। गौला नदी से मिलने वाले पानी पर लोगों की निर्भरता अधिक है, लेकिन लगातार घटते जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। 2 मार्च को जहां गौला में 134 क्यूसेक पानी था, सोमवार को यह घटकर 124 क्यूसेक हो गया, यानी एक सप्ताह में ही 10 क्यूसेक की गिरावट दर्ज हुई।

बारिश की कमी और बढ़ती गर्मी का असर शहर के जल स्रोतों पर भी पड़ रहा है। हल्द्वानी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में गौला से पानी नहीं पहुंच पाने पर स्थानीय जल स्रोतों पर निर्भरता बढ़ गई है। शीतलाहाट समेत अन्य स्रोतों का पानी भी कम हो रहा है, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में टैंकर से पानी उपलब्ध कराना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

जल संस्थान और सिंचाई विभाग ने कहा है कि गर्मी और पानी की कमी के कारण जल स्रोत प्रभावित हुए हैं। हल्द्वानी डिवीजन के कार्यालयों में शिकायतों की संख्या भी बढ़कर दिन में 10 तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह सिर्फ 2–3 दर्ज होती थीं।

अधिशासी अभियंता दिनेश रावत ने बताया कि नदियों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। वहीं, जल संस्थान के रविशंकर लोशाली ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल पहुंचाने के लिए कार्ययोजना बनाई गई है।

हर बूंद की कीमत अब और बढ़ गई है। जलस्तर घटने के इस दौर में हल्द्वानीवासियों के लिए पानी की हर ड्रॉप अनमोल बन गई है। 

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