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  • Written By: Admin
  • Published: April 07, 2026 05:53 PM IST
  • Updated: April 07, 2026 05:55 PM IST
उत्तराखंड

हल्द्वानी में गुरु अर्जन देव जी व गुरु तेग बहादुर जी के प्रकाश पर्व पर भव्य गुरमत समागम

उत्तराखंड के हल्द्वानी शहर में गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा में सिख धर्म के दो महान प्रकाश पर्वों का आयोजन भव्य रूप से हुआ। इस अवसर पर पांचवें पातशाह श्री गुरु अर्जन देव जी और नौवें पातशाह श्री गुरु तेग बहादुर जी के अवतरण दिवस को चढ़दी कला में मनाया गया।

दोपहर का दीवान:
सुबह 11 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हेड ग्रंथी भाई साहिब ठाकुर सिंह जी द्वारा पवित्र कथा से हुई, जिसमें गुरुओं की शहादत और शिक्षाओं पर प्रकाश डाला गया। इसके बाद हजूरी कीर्तनिए भाई प्रभु सिंह खालसा जी ने संगत को शबद कीर्तन के माध्यम से मंत्रमुग्ध कर दिया।

हल्द्वानी के नौजवान कलाकार—भाई जसपाल सिंह, दलजीत सिंह, तनप्रीत सिंह और वीरेंद्र सिंह (वीरू)—की मधुर प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी जीवंत बनाया। विशेष रूप से भाई शुभजीत सिंह जी (हजूरी कीर्तनिए, श्री दरबार साहिब अमृतसर) ने अपनी हाजिरी भरी। संगत ने सामूहिक रूप से शबद गाया और गुरुद्वारा परिसर गुरुवाणी के रस से सराबोर हो गया।

दोपहर के दीवान का समापन गुरु का अटूट लंगर प्रसाद से हुआ, जिसमें सभी भक्तों ने मिलकर भोजन ग्रहण किया।

शाम का दीवान:
शाम 6 बजे से 10 बजे तक आयोजित दीवान में पटियाला से आई प्रसिद्ध कीर्तनिया बीबी जसप्रीत कौर जी संगत को 8:30 से 10 बजे तक अपनी मधुर वाणी से निहाल करेंगी।

कार्यक्रम का विवरण:

  • 7:45–8:00 बजे: नौजवान वीरों द्वारा श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की परिक्रमा चौकी

  • 8:00–8:30 बजे: नौवें महले के श्लोक कीर्तन—भाई जसपाल सिंह, दलजीत सिंह, जगजीत सिंह, अवनीत सिंह एवं समूह संगत द्वारा सामूहिक गायन

  • दीवान का समापन गुरु के लंगर से

आयोजन का महत्व:
यह समागम न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि गुरु साहिबान के बलिदान और शिक्षाओं की याद भी दिलाता है। गुरु अर्जन देव जी ने आदि ग्रंथ संकलित कर सिख धर्म को मजबूत किया, जबकि गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अपना बलिदान दिया।

हल्द्वानी जैसे शहर में ऐसे आयोजन सिख समुदाय को सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं और उत्तराखंड में सिख बिरादरी के सामाजिक योगदान को भी दर्शाते हैं।

गुरुद्वारा गुरु नानकपुरा प्रबंधन कमेटी के मुख सेवादार रमनदीप सिंह सहनी जी और सेवक परिवार ने समूह संगत और सभी प्रतिभागियों को हार्दिक बधाई दी और समागम की सफलता की कामना की

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