ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: February 17, 2026 03:00 PM IST
  • Updated: February 17, 2026 03:01 PM IST
उत्तराखंड

उत्तराखंड में ऊर्जा हड़ताल पर सरकार का 'हंटर': तीनों निगमों में ESMA लागू, हड़ताल की तो सीधे जेल; डाकपत्थर आंदोलन के बीच कड़ा फैसला

देहरादून। प्रदेश में बिजली आपूर्ति ठप करने की धमकी देने वाले ऊर्जा कर्मियों के खिलाफ धामी सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने राज्य के तीनों ऊर्जा निगमों में 'उत्तर प्रदेश अत्यावश्यक सेवाओं का अनुरक्षण अधिनियम 1966' यानी एस्मा (ESMA) लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इस आदेश के बाद अब यूपीसीएल, पिटकुल और यूजेवीएनएल के कर्मचारी अगले छह माह तक किसी भी सूरत में हड़ताल पर नहीं जा सकेंगे।

क्यों उठाया गया यह कदम? (Key Highlights)

  • डाकपत्थर का तनाव: यूजेवीएनएल की जमीनों को कथित तौर पर निजी हाथों में सौंपने के आरोपों को लेकर डाकपत्थर क्षेत्र में जबरदस्त आंदोलन चल रहा है।

  • निजीकरण का विरोध: केंद्र सरकार के निजीकरण प्रस्ताव के खिलाफ ऊर्जा क्षेत्र के संगठन लंबे समय से लामबंद हैं और हाल ही में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल भी कर चुके हैं।

  • सेवाओं की अनिवार्यता: बोर्ड परीक्षाओं और गर्मियों की आहट के बीच बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए सरकार ने हड़ताल को 'अवैध' घोषित करने का रास्ता चुना है।

मैनेजमेंट को 'फ्री हैंड': आदेश का उल्लंघन पड़ा भारी

अधिसूचना जारी होते ही तीनों निगमों के प्रबंधन ने अपने-अपने स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं।

  1. कठोर कार्रवाई: एस्मा लागू होने के बाद यदि कोई कर्मचारी काम पर नहीं आता या हड़ताल का समर्थन करता है, तो उसे बिना वारंट गिरफ्तार किया जा सकता है और सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।

  2. हाई अलर्ट पर प्रबंधन: यूपीसीएल, पिटकुल और यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशकों (MDs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे हर सब-स्टेशन और पावर हाउस की निगरानी करें।

क्या है एस्मा (ESMA)?

यह एक ऐसा कानून है जिसे सरकार आवश्यक सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए लागू करती है। इसके लागू होने के बाद कर्मचारियों को काम पर लौटना अनिवार्य होता है। मना करने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।

आंदोलनकारी संगठनों में उबाल

एक ओर सरकार ने सख्ती दिखाई है, वहीं दूसरी ओर कर्मचारी संगठनों में इस फैसले को लेकर नाराजगी है। संगठनों का कहना है कि उनकी मांगों पर विचार करने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कर्मचारी इस आदेश को चुनौती देंगे या काम पर लौट आएंगे।

"विद्युत सेवाएं जनहित में अनिवार्य हैं। किसी भी परिस्थिति में आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी। एस्मा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होगी।"आर. मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख सचिव

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×