बागेश्वर। राजस्थान और मध्य प्रदेश में खांसी की दवा के सेवन से बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुपालन में उत्तराखंड राज्य खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन सक्रिय हो गया है। इसी क्रम में औषधि निरीक्षक पूजा रानी ने जिले के विभिन्न मेडिकल स्टोर्स होलसेल और रिटेल दोनों स्तरों पर औचक निरीक्षण अभियान चलाया। औषधि निरीक्षक ने कई प्रतिष्ठानों से तीन कफ सिरप के नमूने एकत्र कर राजकीय औषधि विश्लेषणशाला को भेजे हैं। साथ ही जिला चिकित्सालय स्थित केंद्रीय औषधि भंडार में रखी दवाओं की भी जांच की। जहां से बच्चों के उपयोग में आने वाली दस संदिग्ध दवाओं के नमूने लिए गए हैं। औषधि निरीक्षक पूजा रानी ने बताया कि यह अभियान भारत सरकार की एडवाइजरी के अनुपालन में किया जा रहा है, जिसके तहत प्रदेश के सभी जनपदों में कफ सिरप की गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने बताया कि अपर आयुक्त ने सभी औषधि निरीक्षकों को चरणबद्ध तरीके से नमूने एकत्र करने और जांच रिपोर्ट आने पर दोषपूर्ण दवाओं को बाजार से हटाने के निर्देश दिए हैं। पूजा रानी ने मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार की खांसी या जुकाम की दवा बिना चिकित्सक की सलाह के नहीं दी जानी चाहिए। 5 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में भी कफ सिरप का उपयोग केवल चिकित्सक की जांच के बाद, उचित खुराक और न्यूनतम अवधि तक ही किया जाना चाहिए। औषधि निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि यदि लैब जांच में दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती, तो उनके खिलाफ ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट 1940 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।






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