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  • Written By: Admin
  • Published: July 07, 2026 04:03 PM IST
राज्य

गंगा के जलस्तर में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट

रूड़की। मानसून की सुस्त रफ्तार और अपेक्षित वर्षा नहीं होने का असर अब गंगा के जलस्तर पर दिखाई देने लगा है। यूपी सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार पिछले वर्ष जुलाई के प्रथम सप्ताह तक गंगा के जलप्रवाह में 50 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है। पिछले साल जलस्तर एक लाख क्यूसेक को छू गया था जबकि इस बार जलस्तर महज 45 हजार क्यूसेक तक ही सीमित है। पानी की इस कमी का कई क्षेत्रों पर गंभीर परिणाम देखने को मिल सकता है।
अप्रैल से जून 2026 के दौरान भी नदियों के जलप्रवाह को लेकर विभागीय आंकड़े और भी चिंता पैदा कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि इन तीन महीनों में नदियों में औसतन 30 प्रतिशत तक कम पानी बहा। गौरतलब है कि गंगा में पानी की कमी का सीधा असर रुड़की की गंगनहर पर पड़ता है। इसी गंगनहर से हरिद्वार जिले समेत यूपी के अन्य जिलों में सिंचाई के साथ ही दिल्ली में पेयजल आपूर्ति होती है।
पानी कम होने से गन्ना, धान और अन्य खरीफ फसलों के लिए पानी की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा भूजल रिचार्ज की रफ्तार धीमी होने से आने वाले महीनों में नलकूपों और हैंडपंपों के जलस्तर पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि यही स्थिति बनी रही तो कृषि उत्पादन, पेयजल आपूर्ति और पर्यावरणीय संतुलन पर भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है। यूपी सिंचाई विभाग के अधिकारी लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने पर स्थिति में सुधार संभव है लेकिन फिलहाल उपलब्ध आंकड़े पानी के गंभीर संकट की ओर संकेत कर रहे हैं।
मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार अगस्त माह में भी पानी के स्तर में सुधार के संकेत नहीं हैं। माना जा रहा है कि जुलाई माह से भी कम बारिश हो सकती है। इसका सीधा असर आने वाले दिनों में खेतों में सिंचाई के गंभीर संकट के रूप में रूप में दिखाई दे रहा है।

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