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  • Written By: Admin
  • Published: February 21, 2026 01:58 PM IST
  • Updated: February 21, 2026 01:59 PM IST
उत्तराखंड

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने छात्र-छात्राओं के साथ किया राष्ट्रीय सुरक्षा पर संवाद, सामरिक सोच और चाणक्य नीति पर डाला प्रकाश

भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान शनिवार को हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के चौरास परिसर पहुंचे। विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में उन्होंने छात्र-छात्राओं से राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर विस्तृत संवाद किया।

गार्ड ऑफ ऑनर और स्वागत

मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सीडीएस को एनसीसी कैडेट्स की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इसके बाद उन्होंने युवाओं के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

प्राचीन और आधुनिक सामरिक सोच

जनरल चौहान ने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय सामरिक परंपरा, चाणक्य नीति और आधुनिक युद्ध रणनीति पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल वर्दीधारी अधिकारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग की साझा जिम्मेदारी है।

उन्होंने पौराणिक काल में धनुर्वेद में व्यूह रचना, धनुर्विद्या और सेना संचालन का उल्लेख किया। वहीं चाणक्य नीति में राज्य संरक्षण, शक्ति संतुलन और कूटनीतिक सोच की झलक आज भी भारत की विदेश नीति में दिखाई देती है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के तीन घेरों की चर्चा

सीडीएस ने राष्ट्रीय सुरक्षा को तीन महत्वपूर्ण घेरों में बांटा:

  1. बाहरी घेरा – कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक पर आधारित दीर्घकालीन रणनीति।

  2. मध्य घेरा – राष्ट्र की रक्षा व्यवस्था।

  3. आंतरिक घेरा – आत्मनिर्भरता, सेनाओं की संरचना और युद्ध योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन।

बदलते युद्ध स्वरूप और रणनीति

जनरल चौहान ने कहा कि अब पारंपरिक युद्धों की जगह इंटेलिजेंस, साइबर स्पेस और सूचना आधारित युद्ध महत्वपूर्ण हो गए हैं। उन्होंने भारत के सामने दो परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों की चुनौतियों और आंतरिक अस्थिरता, आतंकवाद व सीमा विवाद जैसी चुनौतियों का जिक्र किया।

उनका संदेश स्पष्ट था – देश को दीर्घकालीन युद्ध की तैयारी के साथ-साथ छोटे और स्मार्ट युद्ध की रणनीति पर भी फोकस करना आवश्यक है।

इस संवाद ने छात्रों में राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ ही सामरिक सोच को जन-जन तक पहुँचाने का उद्देश्य भी स्पष्ट किया।

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