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  • Written By: Admin
  • Published: March 11, 2026 01:56 PM IST
  • Updated: March 11, 2026 02:01 PM IST
उत्तराखंड

CAG रिपोर्ट में उजागर हुई नमामि गंगा की खामियां: उत्तराखंड में सीवेज प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल

गंगा केवल एक नदी नहीं है — यह भारत की आस्था, संस्कृति और करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। लेकिन गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना Namami Gange Programme के क्रियान्वयन पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

हाल ही में Comptroller and Auditor General of India (CAG) की रिपोर्ट ने उत्तराखंड में इस योजना की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। राज्य विधानसभा में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया है कि सीवेज प्रबंधन, कचरा निपटान, निगरानी तंत्र और जन जागरूकता अभियानों में कई गंभीर कमियां रही हैं।

ऑडिट में पाया गया कि कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या तो पूरी तरह से सीवर नेटवर्क से जुड़े नहीं हैं या फिर आंशिक रूप से जुड़े हुए हैं।

इसके कारण बड़ी मात्रा में बिना ट्रीटमेंट का सीवेज सीधे गंगा में बह रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक Uttarakhand Jal Sansthan ने निर्माण और संचालन में खामियों के कारण 18 STP को अपने अधीन लेने से ही इनकार कर दिया। 

योजनाओं पर खर्च भी बेहद कम

ऑडिट में यह भी सामने आया कि नमामि गंगा के तहत नियोजित बजट का केवल 16 प्रतिशत ही खर्च किया गया।

कुल 42 परियोजनाओं की जांच में शामिल थे:

  • 25 सीवेज प्रबंधन परियोजनाएं

  • 15 घाट विकास और नदी तट सफाई परियोजनाएं

  • 1 वृक्षारोपण परियोजना

  • 1 औद्योगिक प्रदूषण नियंत्रण परियोजना

इतनी बड़ी योजना होने के बावजूद कार्यान्वयन की रफ्तार बेहद धीमी पाई गई। 

गंगा किनारे बसे शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि कई जगहों पर कचरा:

  • नदी की ढलानों पर फेंक दिया जाता था

  • या बिना प्रसंस्करण के जला दिया जाता था

बारिश या बहाव के दौरान यह कचरा फिर से गंगा में चला जाता है, जिससे प्रदूषण और बढ़ जाता है। 

ऑडिट के दौरान गंगा के विभिन्न शहरों में जल गुणवत्ता का आकलन भी किया गया।

  • Devprayag तक पानी की गुणवत्ता A श्रेणी में रही

  • Rishikesh में 2019–2023 के बीच B श्रेणी

  • Haridwar में पूरी अवधि के दौरान B श्रेणी

ये श्रेणियां Central Pollution Control Board द्वारा तय सतही जल गुणवत्ता मानकों के अनुसार निर्धारित की जाती हैं।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जन जागरूकता अभियानों की कमी के कारण नमामि गंगा के तहत बनाए गए कई श्मशान घाट भी पर्याप्त रूप से उपयोग में नहीं आए।

इसके अलावा वन संरक्षण और वृक्षारोपण से जुड़ी परियोजनाओं में भी सीमित प्रगति देखी गई।

गंगा को स्वच्छ बनाने का सपना देश के करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। लेकिन CAG की रिपोर्ट यह सवाल जरूर उठाती है कि क्या योजनाओं की घोषणा भर से गंगा साफ हो जाएगी?

जब तक परियोजनाओं की सही योजना, समय पर कार्यान्वयन और स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक गंगा को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य अधूरा ही रहेगा।

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