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  • Written By: Admin
  • Published: September 21, 2026 04:03 PM IST
राज्य

यूपीआई पर प्रस्तावित एमडीआर पर व्यापारियों ने जताई चिंता

रुद्रपुर। यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट  को लेकर व्यापार मंडल ने चिंता जताई है। इस मामले में रुद्रपुर में व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा ने कहा कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत नहीं डाली जानी चाहिए। हालांकि केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर उपभोक्ताओं पर लगाया जाने वाला टैक्स या शुल्क नहीं है और छोटे व्यापारियों व अधिकांश यूपीआई लेनदेन को इससे बाहर रखा गया है। व्यापार मंडल ने सरकार से व्यवस्था की समीक्षा कर व्यापारियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग की है।
संजय जुनेजा ने कहा कि सरकार ने डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया, जिसके तहत व्यापारियों ने ग्राहकों को यूपीआई के माध्यम से भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई। ऐसे में आज छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े प्रतिष्ठानों तक बड़ी संख्या में व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर रहे हैं। उनका कहना है कि व्यापारियों पर किसी भी प्रकार की अतिरिक्त लागत बढ़ने से पहले उसके प्रभाव का आकलन किया जाना चाहिए। हालांकि, केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि मौजूदा व्यवस्था में यूपीआई पर लगाया जाने वाला एमडीआर कोई सरकारी टैक्स नहीं है और इसे ग्राहकों से वसूलने का प्रावधान नहीं है। 15 सितंबर 2026 को वित्त मंत्रालय ने कहा कि व्यक्ति-से-व्यक्ति यूपीआई भुगतान किसी भी राशि पर निःशुल्क रहेगा। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी एमडीआर से मुक्त रहेंगे और छोटे व्यापारियों के लिए शून्य-एमडीआर व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत व्यापारी यूपीआई लेन-देन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे। व्यापार मंडल जिला अध्यक्ष गुरमीत सिंह ने कहा कि यदि किसी स्तर पर डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ती है तो व्यापारियों को इसका आर्थिक दबाव महसूस हो सकता है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों का कारोबार पहले से ही विभिन्न खर्चों और बाजार की चुनौतियों से प्रभावित है। उपभोक्ता पलविंदर सिंह ने भी डिजिटल भुगतान व्यवस्था में किसी अतिरिक्त बोझ को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्राहक पहले ही वस्तुओं की कीमत और लागू करों का भुगतान करते हैं। ऐसे में सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल भुगतान की लागत का भार किसी अप्रत्यक्ष तरीके से उपभोक्ताओं पर न आए।

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