देहरादून। समाज में जारी अंधविश्वासों के चलते दिपावली पर्व पर हर साल कुछ वन्य जीवों में खतरा मडराने लगा है। जिसे देखते हुए वन विभाग दिवाली को लेकर पूरी तरह से सर्तक हो गया है। प्रमुख वन संरक्षक ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर वनाधिकारियों को पत्र लिखकर गश्त बढ़ाने समेत कई निर्देश दिए हैं।
अंधविश्वास है कि दिपावली के समय उल्लू से जुड़ी पूजा की जाए, तो धन, संपदा बढ़ती है। इसी धन बढ़ोतरी की उम्मीद में कुछ लोग उल्लू के लिए मनमाफिक राशि देने को तैयार रहते हैं। ऐसे में शिकारियों के उल्लू के पकड़ने, अवैध रूप से कब्जे में रखने और व्यापार करने की आशंका रहती है।
इसी आशंका के चलते प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव नीना ग्रेवाल ने सभी निदेशक और डीएफओ को पत्र जारी किया है। इसमें उल्लू एवं निशाचर वन्यजीवों की उपस्थिति वाले क्षेत्रों में विशेष ध्यान देने को कहा गया है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के एसोसिएट डायरेक्टर टीटो जोसेफ बताते हैं कि उनके संस्था के पास जो रिकॉर्ड है, उसके अनुसार साढ़े चार साल में देश के विभिन्न हिस्सों में 13 जिंदा उल्लू को बरामद किया गया है।भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ विपुल मौर्य बताते हैं कि वन्यजीवों से जुड़े कई अंधविश्वास हैं। हालांकि जागरूकता बढ़ने और वन महकमे की सख्ती के साथ ही इसमें कमी आई है। पर अगर अंधविश्वास की बात करें तो उल्लू की तरह कछुआ से जुड़ा एक अंधविश्वास और भी है। इसमें माना जाता है कि कुछ खास तरह के कछुआ की पूजा की जाए, तो धन की बढ़ोतरी होती है। इसी तरह दो मुंह वाला सांप (रेडसेंड बोआ) जो विषैला नहीं होता है, उसके बारे में भी माना जाता है कि यह जिसके पास होगा, उसके पास धन संपदा की कमी नहीं होगी। वर्ष-2013 हल्द्वानी में रेलवे स्टेशन के पास तस्करों से ऐसा ही सांप पकड़ा गया था।
इसके अलावा कई और तरह के विश्वास भी है। इसमें बाघ और तेंदुआ का नाखून-दांत को पहनने से डर दूर होने की बात कही जाती है। वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन सोसाइटी ऑफ इंडिया के उत्तराखंड के सीनियर फील्ड ऑफिसर राजेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि यह सब भ्रांति है, इन सबसे कुछ नहीं होता है।






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