ADVERTISMENT
  • Written By: Admin
  • Published: October 17, 2026 01:51 PM IST
राज्य

जेल की सलाखों के पीछे बंदी बने राम-लक्ष्मण और रावण

हरिद्वार। विजयदशमी के त्योहार से पहले हरिद्वार जिला कारागार में भी रामलीला का आयोजन किया गया है। खास बात है कि यहां रामलीला के पात्र कोई पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि जेल की चारदीवारी के भीतर सजा काट रहे बंदी हैं। कोई राम बनकर मर्यादा का संदेश दे रहा है तो कोई लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता और रावण के किरदार में नजर आ रहा है। अलग-अलग धर्मों के बंदियों की भागीदारी इस आयोजन को खास बना रही है। यह धार्मिक आयोजन, जेल में बंद बंदियों को तनाव और अवसाद से बचाता है।
हरिद्वार जेल में गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी और होली, दिवाली जैसे सभी त्योहार धूमधाम के साथ मनाए जाते हैं। आजकल जेल में भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है। धर्म और जातपात के बंधन से मुक्त सभी कैदी इस रामलीला में भागीदारी निभा रहे हैं। रामलीला से पहले भक्ति गीत, डायलॉग और अभिनय की रिहर्सल की जाती है। घंटों रिहर्सल करने के बाद शाम को मंच सज जाता है। अभिनय करने वाले बंदियों ने बताया कि, उन्हें जेल में होने का एहसास नहीं होता। अपने किरदार को पूरे उत्साह और उमंग के साथ अभिनय करते हैं। रामलीला में हिस्सा लेने से उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिल रहा है।बंदियों के अनुसार, जेल प्रशासन उन्हें मेकअप, लाइट, साउंड, मंच जैसी सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। इस तरह के आयोजनों से उनका मन सकारात्मक गतिविधियों में लगता है और उन्हें कुछ नया सीखने का अवसर मिलता है। अलग-अलग धर्मों के बंदी भी इस आयोजन में बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं। इससे आपसी मेलजोल और भाईचारे का संदेश भी सामने आ रहा है। एक तरह उन्हें तनाव नहीं होता, दूसरी तरफ धार्मिक आयोजनों से उन्हें बुराई छोड़कर अच्छाई के मार्ग पर चलने की सीख मिलती है। जिला कारागार में बंदियों की इस प्रतिभा को निखारने और तनाव से मुक्त रखने के लिए जेल प्रशासन की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। जेल प्रशासन की ओर से कलाकार बंदियों को मंचन के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि वे पूरे उत्साह के साथ रामलीला का मंचन कर सकें।
हरिद्वार जिला कारागार में हो रही रामलीला यह संदेश दे रही है कि प्रतिभा किसी सीमा की मोहताज नहीं होती। जेल की चारदीवारी के भीतर रामलीला का मंचन बंदियों के जीवन में सकारात्मकता लाने की एक पहल है। राम जन्म, सीता स्वयंवर, राम बारात, राम वनवास, सीता हरण, लंका दहन जैसे सभी मंचन बड़े उत्साह के साथ हो रहे हैं। यहां सभी धर्मों के बंदी बंद हैं, लेकिन धार्मिक आयोजन में सबकी भागीदारी एकसामन है। बिना किसी भेदभाव के सामाजिक समरसता का संदेश दिया जा रहा है।

ADVERTISMENT

Today’s ePaper

Read today’s ePaper
ADVERTISMENT
ADVERTISMENT
×